मारवा अल-सबुनि
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(यह वार्ता इंटरनेट पर मई २०१६ में होम्स में रिकॉर्ड किया गया होम्स सीरिया के ६वर्ष के युद्ध में नष्ट हो गया था) मेरा नाम मारवा है और मैं एक आर्किटेक्ट हूँ| मेरा जन्म और पालन-पोषण होम्स में हुआ, जो कि एक शहर है सीरिया के मध्य-पश्चिम में, और शुरू से ही मैं वहाँ रही हूँ| युद्ध के छः साल बाद, होम्स अब एक आधा-नष्ट शहर है| मेरा परिवार और मैं भाग्यशाली थे; हमारा घर अभी भी सलामत खड़ा है | यद्यपि दो साल तक हम घर में कैदी जैसे थे | बाहर जुलुस चल रहे थे और लड़ाई और बमबारी और निशानेबाज़ थे | मेरे पति और मैं एक वास्तुकला का कार्यालय चलाते थे पुराने नगर के मुख्य चौराहे में| वह सब ख़त्म हो गया है पुराने नगर के अधिकांश इलाके के साथ| शहर के बचे आधे घर-बार अब मलवा हैं| २०१५ के अंत के युद्ध-विराम से, अधिकाँश ओम्स का क्षेत्र ज़्यादातर शांत है| अर्थव्यवस्था पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है और लोग अभी भी लड़ रहे हैं| पुराने नगर के बाजार में जिन व्यापारियों की दुकानें थी अब वे सड़क पर छज्जों में से अपना व्यापार चलाते हैं| हमारे घर के नीचे, एक बढ़ई है, हलवाई है , कसाई है, छापने वाली प्रैस, कार्यशाला, इत्यादि और भी हैं| मैं ने अंश-कालीन पढ़ाना शुरु किया, और मेरे पति के साथ जो काफी सारे अनियत काम करते हैं, हमने एक छोटी किताबों की दुकान खोली| दूसरे लोग हर तरह के काम करते हैं, गुज़ारा चलाने के लिए| जब मैं अपने तबाह शहर को देखती हूँ जरूरन अपने आप से सवाल करती हूँ: इस अर्थहीन युद्ध की क्या वजह है? सीरिया व्यापक रूप से एक सहनशील जगह था, ऐतिहासिक रूप से विविधता से आदि, की विविधता को समायोजित करता रहा जैसे धर्म, मूल, रिवाज़, वस्तु, आहार| कैसे हो गया की मेरा देश — एक देश जिसमे समुदाय शांतिपूर्वक साथ रहते और अपने मतभेदों पे चर्चा करने से परिचत हैं — कैसे यह बिगड़ गया, गृह-युद्ध, हिंसा, विस्थापन और अभूतपूर्व साम्प्रदायिक घृणा में बहुत कारण थे इस युद्ध के लिए — सामजिक, राजनितिक और आर्थिक| उन सबने अपनी भूमिका निभाई| पर मेरा मानना है एक महत्वपूर्ण कारण है जिससे हम अज्ञात हैं और यह विश्लेषण के लिए ज़रूरी है, क्योंकि इससे निर्भर होगा कि यदि हम सुनिश्चित कर पाते हैं कि ऐसा फिर ना हो| वह कारण है वास्तुकला| वास्तुकला ने मेरे देश में अहम भूमिका निभाई है लड़नेवाले गुटों के बीच बैर की रचना, निदेश और बढ़ाने में, और यह दुसरे देशों में भी शायद सच हो| एक निश्चित मेल हैं एक जगह के वास्तुकला और वहां बसे समुदायों के स्वरूप में वास्तुकला की ख़ास भूमिका है एक समुदाय के बिखरने में या जुड़ने में| सीरियन समाज चिरंजीव है भिन्न परम्पराओं व प्रथाओं के साथ सीरियों ने खुले व्यापार से समृद्धि और स्थिर समाज पाया है| उन्होंने सही मायने में जगह से सम्बंधित होना पाया, यह दिखता है उनके निर्मित वातावरण में, मस्जिद और गिरिजे जिनका गुथा हुआ निर्माण हुआ, सूक और सार्वजनिक स्थानों के साथ साथ

अनुपात व आकार जो मानवता व सद्भाव के सिद्धांतों पर आधारित है| यह Mixity की वास्तुकला आज भी अवशेषों में पढ़ी जा सकती है| सीरिया का पुराना इस्लामी शहर कई परतों के अतीत पर बनाया गया उनको साथ जोड़ कर और उस मनोभाव में सम्मिलित होकर। और समुदायों ने भी ऐसा ही किया। लोग साथ रहते और काम करते एक ऐसी जगह में जिसने उन्हें वहाँ का सम्बद्ध होने का एहसास दिया और उन्हें घर जैसा अनुभव दिया। उनका एकजुट और सहभागी जीवन उल्लेखनीय था| पर पिछली सदी में, धीमे-धीमे इन स्थानों के नाजुक संतुलन में दखल दी गयी; पहले शहरी नियोजकों ने औपनिवेशिक काल में, जब फ़्रांसीसी उत्साहित होके शुरू हुए, रूपांतरन करने में, उन सीरियाई शहरों को जो उनकेनुसार फीके-पुराने थे। उन्होंने शहर की सड़कें तबाह कर स्मारकों को स्थानांतरित किया उन्होंने उसे सुधार का नाम दिया, वे शुरुआत थे एक लंबे, धीमी गति के उद्घाटन की | हमारे पारंपरिक शहरीकरण और शहरों कि वास्तुकला पहचान व संबंध का आश्वासन देती थी अलग अलग हो के नहीं, परन्तु एक साथ गुथ के| समय के साथ, प्राचीन बेकार होने लगा और नवीन प्रतिष्ठित। निर्मित वातावरण और सामाजिक वातावरण का सामंजस्य आधुनिकता के तत्वों तले रौंद दिया गया — क्रूर, अधूरे कॉन्क्रीट के ब्लॉक, बेपरवाही, सौंदर्य का विनाश, विभाजनकारी शहरीकरण जिसने समुदायों को वर्ग, पंथ या समृद्धि से नियत किया| और ऐसा सब समुदाय के साथ भी हो रहा था| जैसे निर्मित ढांचों के आकार बदलते रहे, वैसे वैसे सामुदायिक जीवन शैली और समुदायों से संबंध की भावना भी बदलने लगीं। साथ और सम्बन्ध से हटकर, वास्तुकला भेदभाव का एक तरीका बन गया, और समुदाय अलग-थलग होने लगे उस ढांचे से जो उन्हें जोड़ता था, और उस जगह के सार से, जो पहले उनके साझे अस्तित्व को दर्शाता था| हालांकि बहुत सारे कारण हैं सीरियाई युद्ध के लिए, हमें कम महत्त्व नहीं देना चाहिए जिस तरीके से, पहचान और आत्म-सम्मान में क्षति होने में योगदान देकर शहरी क्षेत्रीकरण और बहकी हुई अमानवीय वास्तुकला ने सांप्रदायिक विभाजन और नफरत को बढ़ावा दिया है| समय के साथ, वह संगठित शहर बदल के शहर का मुख्य केंद्रबिंदु बन गया और गरीब बस्तियां उसके घेरे के पार| और साथ ही सुसंगत समुदायों अलग सामाजिक समूह बन गए, एक दुसरे से पराए होकर और उस जगह से पराये होकर। मेरे दृष्टिकोण में, एक जगह से संबंधित रहने की भावना खोने ने और किसी के साथ मिल बाँटने की भावना खोने ने नष्ट करना और आसान कर दिया। एक स्पष्ट उदाहरण देखा जा सकता है अनौपचारिक आवास प्रणाली में, जो युद्ध के पहले, सहारा देता था जनसंख्या के 40 प्रतिशत से अधिक को| जी हाँ युद्ध से पहले करीब आधी सीरियाई जनसँख्या मलीन बस्तियों में रहती थी, घेरे के बाहर के क्षेत्र बिना उचित बुनियादी ढांचे के,

अंतहीन पंक्तियां मात्र काले खंडित डिब्बों की जिनमे लोग हैं, वह लोग जो ज्यादातर एक ही समूह से संबंधित थे, चाहे धर्म पर आधारित हो, या वर्ग, या मूल या यह सभी| यह बस्तीनुमा शहरीकरण युद्ध का वास्तविक अग्रदूत साबित हुआ| टकराव बहुत आसान है पूर्व-श्रेणीबद्ध क्षेत्रों के बीच- - जहां वो "दूसरे लोग" रहते हैं| समबन्ध जो पहले शहर को मिला के रखते थे - - चाहे, सुसंगत निर्माण से, सामाजिक या सूक में व्यापार द्वारा, आर्थिक या समकालीन उपस्थिति द्वारा, धार्मिक - - सब खो दिए गए, बहके और अंधाधुंध आधुनिकीकरण में निर्मित वातावरण बनाने में| मुझे विषय से थोड़ा हटने की अनुमति दें| जब मैंने विविध शहरीकरण का दुनिया के दुसरे भागों में होना पढ़ा, जिनमे ब्रिटिश शहरों में संजातीय पड़ोस या पैरिस के इर्द-गिर्द, या ब्रस्सेल्स, मैंने उस अस्थिरता की शुरुआत को पहचान लिया जिसे हमने विनाशकारक रूप में यहां सीरिया में देखा| हमारे शहर गंभीर रूप से नष्ट हो गए हैं, जैसे होम्स, अलेप्पो, दारा और, और भी कई, और देश कि लगभग आधी जनसंख्या अब विस्थापित है| उम्मीद है युद्ध समाप्त होगा, और सवाल जो मुझे पूछना है, वास्तुकार होने के नाते: हम पुनर्निर्माण कैसे करेंगे? ऐसे कौन से सिद्धांत हैं जो हमें अपनाने चाहिए ताकि वही गलतियां न दोहराएं? मेरे दृष्टिकोण से, मुख्य ध्यान ऐसी जगहों के बनाने पर होना चाहिए जो उनके लोगों को सम्बन्ध का अनुभव दें| ज़रूरी है कि वास्तुकला और योजना वापस थाम लें उन कुछ पारंपरिक मूल्यों को जो सिर्फ यही करते परिस्तिथिओं की रचना, जिनसे सहस्तित्व और अमन, सौंदर्य के मूल जो भड़कीला प्रदर्शन नहीं करते बल्कि सुलभ और आसान, नैतिक मूल्य जो उदारता और स्वीकृति, को बढ़ावा दें, वास्तुकला जो सबके आनंद के लिए हो न सिर्फ उत्कृष्ट वर्ग के लिए, बिलकुल जैसे पुराने इस्लामी शहर की छायादार गलियों में, मिश्रित-डिजाइन जो समुदाय की भावना प्रोत्साहित करते हैं| यहां होम्स में एक क्षेत्र जिसका नाम है बाबा अम्र जो कि पूरी तरह नष्ट हो चुका है| करीब २ साल पहले मैंने यह नक्शा प्रस्तुत किया UN-Habitat प्रतियोगिता में इसके पुनर्निर्माण के लिए| एक पेड़ से प्रेरित हो के एक शहरी रचना का विचार था, जो बढ़ पाए और जैविक तरह से फैले, पारंपरिक पुल की याद जो पुरानी गलियों पर खड़ा हो और इनमे शामिल फ्लैट्स, निजी आंगन, दुकानें, कार्यशालाएं, पार्किंग और खेल कूद के लिए जगह पेड़ और छायांकित क्षेत्र। निश्चित हैं कि यह सिद्ध नहीं है| मैंने उसे उन कुछ घंटों में बनाया जब हमें बिजली मिलती है और कई संभव तरीके हैं सम्बन्ध और समुदाय को व्यक्त करने के वस्तुकला के माधयम से| लेकिन इसकी तुलना कीजिये, पृथक ब्लॉक्स के साथ जो बाबा अम्र परियोजना के पुनर्निर्माण के लिए आधिकारिक प्रस्ताव था| वास्तुकला वह धुरी नहीं जिसके इर्द-गिर्द मानवीय जीवन घूमता है, पर उसमे इंसानी क्रिया को संकेत और संचालन करने की शक्ति है| उस सन्दर्भ में, रिहाइश, पहचान और सामजिक एकीकरण सभी निर्माता और उत्पाद हैं प्रभावी शहरीकरण के| पुराने इस्लामी शहर के सुसम्बद्ध शहरीकरण और उदाहरण के लिए काफी पुराने यूरोपीय शहर, एकीकरण को बढ़ावा देते हैं जबकि निर्जीव आवास की पंक्तियाँ या इमारतों का झुण्ड हालांकि शानदार, अलगाव और "अन्यता" को बढ़ावा देती हैं मामूली चीज़ें भी जैसे छायादार जगह या फलपौधे या शहर में पीने का पानी एक अंतर प्रकट करा सकता है कि लोग उस जगह को कैसे महसूस करते है यदि उसे एक उदार, दानी जगह मानते है एक जगह जो ख्याल रखने, योगदान देने लायक है या वे उसे पराया बनाने वाली घृणा के बीजों से भरी जगह मानते हैं| एक जगह के दानी होने के लिए ज़रूरी हैं कि उसका वास्तुकला भी दानी हो| हमारा निर्मित पर्यावरण मायने रखता है| हमारे शहरों की बनावट की छवि हमारे आत्मिक बनावट में दिखती है| और चाहे कॉन्क्रीट बस्तियों के रूप में या टूटा-फूटा सामजिक आवास या रोंदे हुए पुराने शहर या इमारतों के जंगल, जो कि समकालीन शहरी रूप पूरे मध्य-पूर्व में उभर रहे हैं यह एक कारण है हमारे समुदायों में अलगाव और विखंडन का| हम इससे सीख सकते हैं हम इससे सीख सकते हैं पुनर्निर्माण का एक और तरीका एक वास्तुकला की रचना जिसका योगदान रहे लोकजीवन के आर्थिक व व्यावहारिक पहलुओं और उनकी सामजिक, आत्मिक और मानसिक ज़रूरतों पर| यह ज़रूरतें पूरी तरह अनजान रहीं युद्ध से पहले सीरियाइ शहरों में हमें फिर रचने होंगे शहर, जहां रहने वाले समुदाय सहभागी हों यदि हम ऐसे करें, तो लोग अपनी पहचान, अपने पडोसीयों के विरुद्ध नहीं ढूंढेंगे, क्योंकि वह सबके लिए घर का माहौल होगा | सुनने के लिए धन्यवाद|