रोबर्ट वल्डीन्गेर
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जब जीवन से रूबरू होते हैं हमें स्वस्थ और खुश कौन रखता हैं यदि आप अभी निवेश कर रहे हैं आपके सुनहरे कल के लिए तो आप अपनी शक्ति और समय कहाँ लगायेंगे? लखपतियों का एक सर्वे किया गया उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य क्या थे, उनमे से 80% ने कहा था कि जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य था अमीर बनाना अन्य 50% जो उसी युवा वयस्कों में से थे दूसरा बड़ा जीवन का लक्ष्य था नाम कमाना, प्रसिद्धि पाना.

हंसीं

और हमे नियमित रूप से कहा गया कड़ी मेहनत करो, अधिक से अधिक प्राप्त करो हमें यह बताया गया कि यही वे चीजें जिनके पीछे हमें लगना हैं इससे ही हमें अच्छा जीवन मिलेगा . पूरे जीवन की तस्वीरें, जो रास्ते लोगो ने चुने और उन रास्तों पर उन्हें क्या मिला, वे तस्वीरें मिल पाना लगभग असम्भव हैं मानवीय जीवन के बारे में हम जानना चाहते हैं हम लोगो से उनके भूतकाल की यादों को पूछकर जानते हैं और जैसा कि हम जानते हैं यादे तो यादे हैं हमारे जीवन में जो होता हैं, उसका अधिकांश भाग हम भूल जाते हैं, और कभी-कभी हमारी याददाश्त सीधे-सीधे रचनात्मक होती

पर कैसा हो यदि हम सम्पूर्ण जीवन को देख सके जैसे जैसे समय आगे बढ़ता हैं? कैसा हो यदि हम लोगो को पढ़ सकें तब से जब वे किशोर थे और फिर धीरे धीरे वृद्ध होते गए यह देखने के लिये कि कौन सी वस्तु लोगो को खुश व स्वस्थ रखती हैं?

और हमने ऐसा किया वयस्कों के विकास पर हावर्ड का अध्ययन "वयस्कों के जीवन पर" किये गए अध्ययनों में सबसे लम्बे समय तक चला अध्ययन हैं 75 साल तक, 724 लोगो के जीवन पर हमने नजर रखी साल दर साल, उनके काम के बारे में पूछकर, उनका घरेलु जीवन, उनका स्वास्थ्य, पूरे रास्ते में यह सब पूछा, बिना जाने कि उनके जीवन की कहानी क्या बनेगी

इस तरह के अध्ययन विरले होते हैं इस प्रकार की परियोजनाए लगभग सभी एक दशक में समाप्त हो जाती हैं क्योंकि अध्ययन में बहुत से लोग छूट जाते हैं, या फिर वितीय साधन समाप्त हो जाते हैं, या अनुसंधान में भटकाव आ जाता हैं, या फिर वे मर जाते हैं, और कोई आगे लेजाने वाला नहीं होता हैं परन्तु कई सारे भाग्यों के परिणामस्वरूप व, अध्ययनकर्ताओं की पीढियों के सतत प्रयासों, यह अध्ययन सम्पूर्ण हो पाया हमारे 724 पुरूषों में से लगभग 60 अभी भी जीवित हैं, और अध्ययन में अभी भी भागीदारी करते हैं, उनमे से अधिकांश 90 साल से अधिक उम्र के हैं और अब हम अध्ययन करने जा रहे हैं इन लोगों के 2000 से अधिक बच्चों के साथ और इस अध्ययन का मैं चौथा डायरेक्टर हूँ

1938 से हमने, आदमियों के दो समूहों के जीवन को नजदीक से देखा अध्ययन मे पहला समूह जुड़ा जब वे हावर्ड कालेज में नये-नये आये थे उन सबने कालेज की पढाई दुसरे विश्व युद्ध के दोरान पूरी की और उनमे से अधिकांश ने युद्ध में भाग लिया और दूसरा समूह जो हमने चुना था बोस्टन के गरीब पडोसियों के लड़के, लड़के जिन्हें अध्ययन के लिए चुना गया विशेषकर क्योंकि वे बहुत ही समस्याग्रस्त और वंचित परिवारों जो कि 1930 के बोस्टन से थे बहुत से झुग्गियों में रहते थे और उनके पास गर्म व ठण्डे पानी की आपूर्ति भी नहीं थी

जब वे अध्ययन में जुड़े, इन सभी किशोरों का साक्षात्कार हुआ उनके स्वास्थ्य की जाँच की गई हम उनके घर गए, उनके पालकों का साक्षात्कार किया और फिर ये किशोर वयस्क हो गए जीवन के अलग-अलग क्षेत्र मे गए वे वकील, डॉक्टर, क्लर्क व मिल-मजदूर बने और एक तो अमेरिका का राष्ट्रपति भी कुछ शराबी हो गये तो कुछ को मानसिक बीमारियाँ हो गयी कुछ सामाजिकता की राह चले गये पिरामिड मे सबसे नीचे से लेकर एकदम ऊपर तक कुछ लोगों ने तो यात्रा की दिशा ही बदल ली

अध्ययन की परिकल्पना करनेवालों ने सपनों में भी नहीं सोचा होगा या कल्पना की होगी कि 75 साल बाद में यहाँ खड़ा होऊँगा, व आपको बता रहा होऊँगा कि अध्ययन अभी भी चल रहा हैं प्रति दुसरे साल हमारे अनुसंधान टीम सदस्य हमें फ़ोन करके पूछते हैं कि क्या हम उनको भेज सकते हैं हमारे जीवन के बारे मे फिर एक और प्रश्नों का सेट

बोस्टन शहर के बहुत से भीतरी हिस्सों के आदमी हमसे पूछते हैं, "आप मेरे बारे में क्यों अध्यनरत हो? मेरा जीवन इतना रोचक नहीं हैं" परन्तु हावर्ड के आदमी ऐसा नहीं पूछते

(हंसी)

इन जीवनों की स्पष्ट तस्वीरें पाने के लिये, हम उनको केवल प्रश्नों का सेट नहीं भेजते हम उनके "लिविंग-रूम" में उनका साक्षात्कार करते हैं हम उनके डॉक्टर्स से उनका स्वास्थ्य रिकॉर्ड लेते हैं हम उनके खून का सैंपल लेते हैं व ब्रेन का स्कैन भी, हम उनके बच्चों से बातें करते हैं हम उनकी अपनी पत्नियों के साथ अपनी समस्या पर बात करते हुए विडियो बनाते हैं और लगभग एक दशक पहले जब हमने उनकी पत्नियों से पूछा क्या वे इस अध्ययन के सदस्य बनाना चाहेंगे, उनमे से कई महिलाओं ने कहा कि "यह समय के बारे मे हैं"

(हंसीं)

तो हमने क्या सीखा ? कई हजारों पन्नो के अध्ययन से हमे क्या सीखने को मिल रहा हैं हमने जो सूचनाये इकठ्ठा की हैं इन जीवनों से? तो, यह सीख धन, नाम, या कड़ी से कड़ी मेहनत के बारे में नहीं हैं 75 साल के इस अध्ययन का स्पस्ट: सुझाव हैं कि "अच्छे सम्बन्ध ही हमें ख़ुश और स्वस्थ बनाते हैं"

हमें संबंधों के विषय में तीन सीख मिली हैं पहली हैं कि सामाजिक संबंध हमारे लिए वास्तव में अच्छे हैं, और यह कि अकेलापन मार-डालता हैं और यह पता चलता हैं कि जो लोग सामाजिक रूप से अधिक जुड़े हैं परिवार के, दोस्तों के और समाज के साथ वे अधिक खुश हैं, वे अधिक स्वस्थ हैं, और वे अधिक लम्बे समय तक जीते हैं उन लोगो के बजाय, जिनके संबंध कम हैं और अकेलेपन का अनुभव, जहर का काम करता हैं जो लोग अन्य लोगो से कट कर रहते हैं देखते हैं कि वे कम प्रसन्न हैं, अधेड़ उम्र मे ही उनका स्वास्थ्य जल्दी ही कमजोर हो जाता हैं उनका दिमाग भी धीरे-धीरे कम करने लगता हैं वे, उन लोगो के मुकाबले कम समय तक जीते हैं जो अकेले नहीं रहते और दुखद बात यह हैं कि, कभी भी आप पूछे तो, पाँच अमरीकियों में से एक खुद को अकेला कहता हैं

और हम जानते हैं कि हम भीड़ में भी अकेले हो सकते हैं आप विवाहित होकर भी अकेले हो सकते हैं, तो हमारे लिए दूसरी सबसे बड़ी सीख हैं कि, यह केवल दोस्तों की संख्या का मामला नहीं हैं, यह "समर्पित संबंधों" का होना या ना होना भी नहीं हैं परन्तु आपके संबंधों की निकटता व गुणवत्ता मायने रखती हैं टकराव की स्थिति मे रहना हमारे स्वास्थ्य के लिए बुरा हैं उदाहरण के लिए बिना किसी लगाव की टकराव वाले विवाहित जीवन तलाक़ लेने से ज्यादा नुकसानदायक होते हैं, स्वास्थ्य के लिये अच्छे, ऊष्मा भरे और घनिष्ठ संबध सुरक्षा प्रदान करते हैं

एकबार जब हम किसी आदमी को उनके अस्सी के दशक तक पड़ते हैं और हम उनके मध्यकाल में जाकर देखते हैं और यदि हम भविष्यवाणी कर पाते कौन आगे जाकर खुश, स्वस्थ और संतुष्ट होगा और कौन नही और जब हमने उनके बारे में इकठ्ठा की जो हम उनके बारे में 50 की उम्र में तो वह उनका उस उम्र का कोलेस्ट्रोल स्तर की बात नहीं थी तो यह तय कर रही थी कि वे कैसे बुजुर्ग बनेंगे वह यह तय कर रहा था कि वे अपने संबंधों से कितने संतुष्ट थे जो लोग अपने 50 के दशक में अपने संबंधों से सबसे ज्यादा सन्तुष्ट थे वे 80 की उम्र मे सबसे स्वस्थ थे और अच्छे निकटतम संबंध हमे सुविधा प्रदान करते हैं वृद्ध होने के कुछ डर के कारण से हमारे सर्वाधिक प्रसन्न स्त्री-पुरुष के जोड़े ने अपने 80 साल मे यह रिपोर्ट किया कि, जब किसी दिन उनको अधिक दर्द होता उनका मुड या मन फिर भी प्रसन्न रहता हैं परन्तु वे लोग जिनके संबंध खुशी से भरे नही थे जब किसी दिन उनको कोई दर्द होता था तो वह मानसिक दर्द से और बाद जाता था

और संबंधों व स्वास्थ्य के बारे में तीसरी बड़ी सीख जो हमे मिली हैं वह यह हैं कि अच्छे संबंध केवल हमारे शरीर को सुरक्षित नहीं करते वे हमारे दिमाग को रक्षा देते हैं अंत में यह पता चला कि दुसरे व्यक्ति के साथ सुरक्षात्मक सम्बन्ध आपकी 80 साल की उम्र मे सुरक्षात्मक होते हैं यह कि जो लोग ऐसे संबंधों में बंधे होते हैं जहाँ वे यह अनुभव करते हैं कि उनके पास समय पर काम आने लायक साथी हैं, उनकी याददाश्त लंबे समय तक स्पष्ट रहती हैं और जो लोग ऐसे संबंधों में होते हैं जहाँ वे उनको लगता हैं कि उनके पास समय पर काम आने लायक साथी नही हैं उनकी याददाश्त जल्दी ही धूमिल हो जाती हैं और ये अच्छे संबंध सभी समय एक से होना आवश्यक नही हैं कुछ हमारे जोड़े एक दुसरे से लड़ते रहते थे दिन-रात, हर रोज परन्तु जब उनको लगा कि वे एक-दूसरे पर भरोसा कर सकते हैं जब साथ चलना मुश्किल हो गया, उन वाद-विवाद का उनकी याद-दाश्त पर असर हुआ

तो यह मेसेज, यह कि हमारे स्वास्थ्य और कुशल के लिये अच्छे, निकट सम्बन्ध बेहतर हैं यह ज्ञान सदियों का हैं क्यों इसको पाना इतना कठिन हैं और भूलने में भी आसान? क्योंकि आखिरकार हम मानव हैं हमें जो सबसे अच्छा लगा वह हैं शीघ्र जुड़ाव कुछ चीजे जो हमें मिल सकती हैं वह हमारे जीवन को अच्छा बनाएगा और उसको वैसा ही बनाये रखेगा सम्बन्ध जटिल और उलझे हुए होते हैं और परिवार व दोस्तों के लिये कठोर कार्य करना रोचक या सेक्सी नहीं प्रतीत होता हैं यह ताउम्र रहता हैं, इसका कभी अंत नहीं आता हमारी इस 75 साल के अध्ययन में, जो रिटायरमेंट के समय सर्वाधिक खुश थे ये वे लोग थे जिन्होंने काम के साथियों को खेलनेवालों से बदल दिया उस सर्वे मे, लखपति लोगो के समान, बहुत से हमारे आदमी जब युवक थे वे धन, नाम और उच्च प्राप्ति मे विश्वास रखते थे यही वे चीजे थी जो उनको अच्छा जीवन जीने के लिये चाहिये थी इन 75 सालों के अध्ययन ने हमें बताया हैं कि वे सबसे अच्छे रहे जिन लोगो ने महत्व दिया रिश्तों को, परिवार के साथ, दोस्तों के साथ, समाज के साथ

तो आपके बारे में क्या हैं? मानलो कि आप २५, या ४०, या ६० साल के हैं सम्बन्ध कैसे दीखते हैं

सम्भावनाये तो असीमित हैं यह इतना साधारण भी हो सकता हैं कि फिल्म के समय को लोगो के साथ से बदल देना या बिगड़ते संबंधों को कुछ नया करके सुधारना दूर तक साथ-साथ टहलना या मधुर मिलन की रात, परिवार के उस सदस्य से मिलना, जिससे बहुत समय से बात ही नहीं हुई, क्योंकि कभी सामान्य पारिवारिक दूरियां खतरनाक रास्ता ले सकते हैं जो एक दुसरे से मन-मुटाव रखते हैं

मार्क ट्वेन के एक कथन के साथ में अपनी बात समाप्त करूँगा! "एक शताब्दी से अधिक पहले, वे अपने जीवन का आकलन कर रहे थे, और उन्होंने यह लिखा कि: जीवन बहुत छोटा हैं, उसमे समय ही नहीं हैं, बुराइयों, दिल जलाने, जैसी बातों के लिए उसमे केवल प्यार के लिए ही समय हैं, उसके लिये, व परन्तु कहने के लिये तात्कालिक

अच्छा जीवन, अच्छे संबंधों से ही बनता हैं

धन्यवाद्

(तालियां)