चरमियान गूच
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जब हम भ्रष्टाचार की बात करते हैं, तो कुछ खास तरह के लोग दिमाग में आते हैं।

एक रूसी अहंकारोन्मादी हैं सपरमुरट नियाजोव जो की उन में से एक हैं 2006 में उनकी मृत्यु से पहले, वो तुर्कमेनिस्तान के बाहुबली नेता थे, जो की प्रकृतिक गॅस के भंडार वाला एक मध्य एशिया का देश है। वे अध्यक्षीय आदेश जारी करना बहुत पसंद करते थे। एक आदेश के द्वारा महीनों के नाम बदल दिये गए जिन में उनके और उनकी माँ के नाम पे रखे गए महीने भी शामिल थे॰ उन्होने करोड़ों डॉलर खर्च कर के एक अजीबो गरीब व्यक्तित्व पंथ बनाया, और उनका सर्वोपरि काम था अपने आप की 40 फुट ऊंची मूर्ति बनवाना, जिस पर सोने का पानी चढ़ा हुआ था जो राजधानी के केन्द्रीय चौक पे शान से खड़ी थी और सूरज के साथ साथ घूमती थी। वो थोड़े असाधारण किस्म के थे।

और फिर वो घिसा पिटा उदाहरण है अफ्रीकी तानाशाह या मंत्री या अधिकारी का। फिर टेओडोरिन ओबीयांग हैं। तो उनके पिता एक्वाटोरियल गिनी के आजीवन राष्ट्रपति हैं, जो की पश्चिमी अफ्रीका का एक देश है जिसने 1990s से करोड़ों डॉलर्ज़ का तेल निर्यात किया है और फिर भी उसका मानवीय अधिकार का लेखा जोखा भयंकर है। उसके अधिकांश लोग दयनीय निर्धनता में जी रहे हैं यद्यपि उनकी प्रति व्यक्ति आय पुर्तगाल के बराबर है. तो छोटे मियां ओबीयांग अपने लिए मलिबू, कैलिफोर्निया मे 3 करोड़ डॉलर्ज़ का महल खरीदते हैं। मैं उसके मुख्य द्वार तक गया हूँ। मैं आप को बता सकता हूँ कि वो बहुत ही भव्य है॰ उसने 1.8 करोड़ यूरो का काला संग्रह खरीदा है जो फ़ैशन डिज़ाइनर वायेस सैंट लौरेंट का होता था, बहुत सारी शानदार गाडियाँ, जिनमे से कुछ एक की कीमत 10 लाख डॉलर्ज़ है — ओह, और एक निजी हवाई जहाज़ भी. अब ये सुनिए: कुछ दिन पहले तक उनकी आधिकारिक आय 7,000 डॉलर्ज़ प्रति माह से कम थी।

और फिर डान एतेते हैं॰ वे नाइजेरिया के पूर्व तेल मंत्री थे राष्ट्रपति अबाछा के शासन काल में, और इतिफाक से वे भी एक दंडित पैसे का हेर फेर करने वाले हैं। हमने काफी समय बिताया 10 करोड़ डॉलर्ज़ — जी हाँ, 10 करोड़ डॉलर्ज़ — की तेल के एक सौदे के बारे मे जांच पड़ताल करने मे, जिसमे वे शामिल थे, और जो हमने पाया वो चौंका देने वाला था, लेकिन उसके बारे मे बाद में।

तो यह सोचना आसान है के भ्रष्टाचार होता है कहीं दूर, लालची तानाशाहों के समूह के द्वारा और ऐसे बदमशों द्वारा जिन मे बारे में व्यक्तिगत रूप से हम बहुत कम जानते हैं और हमे लगता है की हमें उस से क्या लेना देना जो चल रहा हैं वो हमें उस से कोई फरक नहीं पड़ता। लेकिन क्या ये सिर्फ वहीं होता है?

जब मैं 22 साल का था तो मेरी किस्मत बहुत अच्छी थी। विश्वीद्यालय से निकाल कर मेरा पहला काम अफ्रीका मे हाथी दाँत के अवैध व्यापार के बारे में जांच पड़ताल करना था। और इस तरह से भ्रष्टाचार से मेरे रिश्ते की शुरुआत हुई। 1993 मे, दो दोस्तों के साथ मिलकर, जो मेरे साथ काम करते थे, साइमन टेलर और पैट्रिक एली, हमने ग्लोबल वेल्ल्नेस नाम की एक संस्था की स्थापना की। हमारा पहला अभियान जांच पड़ताल थी कि किस तरह से गैर कानूनी पेड़ों की कटाई से कंबोडिया में युद्ध के लिए पैसे जुटाये जा रहे थे।

तो कुछ साल बाद, और अब मैं 1997 कि बात कर रहा हूँ, मैं अंगोला में छुपे रूप से खूनी हीरों की जांच पड़ताल कर रहा था। शायद आपने वो पिक्चर देखि होगी, हॉलीवुड फिल्म "ब्लड डाईमंड", जिसमे लियोनार्डो दी कैप्रियो थे. उसका कुछ भाग हमारे काम पे आधारित था। लुवांडा में बारूदी सुरंगो से पीड़ित लोग भरे हुए थे जो वहाँ की सड़कों पे संघर्ष कर रहे थे जीवित रहने के लिए और युद्ध द्वारा अनाथ बच्चे सड़कों के नीचे नालियों में रह रहे थे, और एक बहुत ही छोटा समृद्ध वर्ग था जो चर्चा करता था अपनी ब्राज़ील और पुर्तगाल मे ख़रीदारी हेतु यात्राओं की। और वो कुछ अजीब सी जगह थी।

तो मैं एक घुटन भरी गर्मी वाले होटल के कमरे में बैठा हूँ व्याकुलता से भरा। लेकिन वह खूनी हीरों की बात नहीं थी। बल्कि क्योंकि मैं वहाँ कई लोगों से बात करता रहता था जो की एक अलग समस्या के बारे में बात करते थे: वैश्विक स्तर पे भ्रष्टाचार के विशाल ताने बाने के बारे में और तेल से प्राप्त करोड़ों डॉलर के गायब हो जाने के बारे में। और क्योंकि उस समय हमारा संगठन बहुत छोटा सा था कुछ ही लोगों का, हमारे लिए यह सोचना शुरू करना कि हम इस से कैसे निपटेंगे भी बहुत बड़ी चुनौती थी। और उन वर्षों में जब मैं, और हम सब ये अभियान चला रहे हैं और जांच कर रहे हैं, मैंने बार बार ये देखा है कि क्या है जो भ्रष्टाचार को वैश्विक, विशाल स्तर पे संभव करता है, यह केवल लालच या ताकत का गलत इस्तेमाल नहीं है या वह असपष्ट वाक्यांश "कमजोर प्रशाशन". मेरा मतलब है कि हाँ, वे सभी भी हैं, लेकिन भ्रस्ताचर को संभव बनाते हैं वो कार्यवाही जो अंतर्राष्ट्रीय प्रेरक करते हैं।

तो उन लोगों कि बात करते हैं जिनकी मैंने पहले चर्चा करी थी। ये सभी वो लोग हैं जिनकी हमने जांच करी थी, और ये सभी वो लोग हैं जो अकेले वो नहीं कर पाते जो उन्होने किया। छोटे ओबीयांग को ही लीजिये। उनके पास उच्च कोटी कि कलाकृतीया और वैभवशाली घर बिना मदद के नहीं आए। उन्होने अंतरराहस्तरीय बैंकों के साथ धंधा किया। पेरिस के एक बैंक में उनके द्वारा चलायी जाने वाली एक कंपनी का खाता था, जो कि कलाकृतिओं को खरीदने के काम आया, और अमरीकी बैंक, उन्होने भेजे 7.3 करोड़ डॉलर अमरीका को जिस में से कुछ कैलिफोर्निया के उस भवन को खरीदने में लगाए गए। और उन्होने ये सब अपने नाम से भी नहीं किया। उन्होने फर्जी कंपनियो का इस्तेमाल किया॰ उन्होने एक का इस्तेमाल किया उस घर को खरीदने के लिए, और दूसरी का, जो किसी और के नाम पर थी, उसके संचालन के विशाल खर्चे देने के लिए।

और फिर डैन एतेते हैं। जब वे तेल मंत्री थे, उन्होने एक तेल का ब्लॉक जिसकी कीमत अब 10 करोड़ डॉलर से ज्यादा है, आबंटित किया एक ऐसी कंपनी को, जो कि आप अनुमान लगा सकते हैं, जी हाँ, जिसके मालिक वो खुद थे। अब, काफी दिनों बाद उसका व्यापार कर दिया गया नाइजीरियाई सरकार कि मदद से — अब मुझे सावधान होना पड़ेगा यहाँ क्या कहूँ - शैल और इटलियाई एनी की सहायक कोंपनियों को, आज कि सबे बड़ी तेल कोंपनियों में से दो।

तो सच्चाई यही है, कि भ्रष्टाचार का इंजिन, जो की उन देशों के तटो से बहुत दूर मौजूद है जैसे की एकूयाटोरियल गिनी या नाइजेरिया या तुर्कमेनिस्तान। इस इंजिन को चलाता है हमारी अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था, बेनामी फर्जी कंपनियो की समस्या, और वह गोपनियता जो हमने प्रदान की है बड़े तेल, गैस और खादान के चालन को, और, सबसे ज्यादा, हमारे राजनेताओ द्वारा असफल रहने मे अपने भाषणों को साकार करने मे और कुछ ऐसा करने मे जो सच में सार्थक और प्रणालीगत हो इस सब से निपटने में।

पहले बैंकों की बात करते हैं। आप को यह जान के ज्यादा आश्चर्य नहीं होगा अगर मैं आप को यह बताऊँ की बैंक काला धन स्वीकार करते हैं, लेकिन वो अन्य विनाशकारी तरीकों से भी अपनी कमाई को प्राथमिकता देते हैं। जैसे की, सरवाक, मलेशिया में। अब इस एलाके में केवल पाँच प्रतिशत जंगल बचे हैं। पाँच प्रतिशत। तो यह कैसे हुआ? ऐसा हुआ क्योंकि एक अभिजात वर्ग और उसके सहायक करोड़ों डॉलर कमाते रहे हैं औध्यौगिक पैमाने पे पेड़ों की कटाई को समर्थन देके कई सालों से। तो हमने एक गुप्त जासूस भेजा गुप्त रूप से शासित वर्ग के सदस्यों की बैठक की फिल्म बनाने को और इसके परिणाम से जो फिल्म बनी, उसने कुछ लोगों को बहुत क्रोधित किया, और आप उसे यू ट्यूब पे देख सकते हैं, लेकिन इस से हमारा शक साबित हो गया, क्योंकि इसमे दिखाया गया की कैसे राज्य के मुखय मंत्री ने, हालांकि बाद मे उनहों इस बात से साफ इंकार कर दिया, कैसे भूमि और जंगल के लाइसेंसों पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल किया अपनी और अपने परिवार की जेबें भरने मे। और एचएसबीसी, हाँ, हम जानते हैं की एचएसबीसी नें पैसे दिये क्षेत्र की सबसे बड़ी लकड़ी काटने वाली कोंपनियों को जो की जिम्मेदार थी उसमे से कुछ विनाश के लिए जो सरवाक और अन्य जगहों पे हुआ। बैंक नें इस प्रकरण में पर्यावरण स्थिरता की अपनी ही नीतियों का उल्लंघन किया, लेकिन उसने 13 करोड़ डॉलर कमाए। अब, हमारे इस खुलासे के थोड़ी देर बाद, इस साल के शुरू में हमारे खुलासे के थोड़ी देर बाद, बैंक ने घोषणा की कि वह इस पर अपनी नीतियों की समीक्षा करेगा। और क्या यह प्रगति है? हो सकता है, लेकिन हम बहुत करीबी नज़र रखेंगे इस मामले पे।

और फिर समस्या है गुमनाम फर्जी कोंपनियों की। हम सबने सुना है कि वो क्या होती हैं, मेरे ख्याल से, और हम सब जानते हैं कि इंका काफी इस्तेमाल होता है उन लोगों और कंपनियों द्वारा जो बचना चाहती हैं समाज कि ओर अपनी समुचित जिम्मेदारियों को निभाने से, जिन्हें कर भी कहते हैं। लेकिन जो आम तौर पे ये उजागर नहीं होता कि किस तरह से फर्जी कोमपीनयों का इस्तेमाल किया जाता है बहुत बड़ी मात्रा में पैसे चुराने के लिए - भीमकाय मात्रा में पैसे चुराने के लिए, गरीब देशों से। लगभग भ्रष्टाचार के उन सभी मामलों में जिनकी हमने जांच करी है, फर्जी कंपनियाँ शामिल थी, और कई बार यह पता लगाना नामुमकिन था की दरअसल उस सौदे में कौन शामिल था।

विश्व बैंक द्वारा एक हाल के अध्ययन नें भ्रष्टाचार के 200 मामलों को देखा। उसने पाया की उन में से 70 प्रतिशत मामलों में फर्जी कंपनियाँ इस्तेमाल करी गईं थी, कुल मिला के तकरीबन 5600 करोड़ डॉलर। इन में से कई कंपनियाँ अमरीका में थीं या इंग्लैंड में, उसके विदेशी क्षेत्रों में और निर्भरता वाले इलाकों में, तो यह केवल देश के बाहर की समस्या नहीं है, यह हमारे अपने देशों की समस्या भी है। आप समझ रहे होंगे, फर्जी कंपनियाँ केंद्र बिन्दु हैं उन गोपनीय सौदों की जो अमीर कुलीन वर्ग को फ़ायदा पहुंचा सकती हैं आम नागरिकों के बनिस्पत।

हाल ही में एक चौंका देने वाले मामले की हमनें जांच की कि कैसे कोंगों लोकतान्त्रिक गणराज्य की सरकार ने बहुमूल्य खनन संपातियों को, जो कि राजय कि संपति थी, बेचा ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह में फर्जी कंपनियों को। तो हमने देश में अपने सूत्रों से बात चीत करी, कंपनी के दस्तावेज़ों और अनय सूचनाओं का अध्ययन किया इस सौदे कि सही तस्वीर जोड़ने के लिए। और हमें जान कर बहुत अचंभा हुआ कि ये फर्जी कंपनियों नें जल्दी से एन मे से कई संपातियों को बेच दिया बहुत बड़े मुनाफे पे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय खनन कंपनियों को जो कि लंदन में पंजीकृत थी। अब, अफ्रीकी प्रगति पैनल, जिसका नेतत्रव कोफी अन्नान करते हैं, उसने यह अनुमान लगाया है कि कोंगों का नुकसान इन सौदों में 130 करोड़ डॉलर से अधिक हैं। ये लगभग दो गुना हैं उस देश के वार्षिक स्वस्थ और शिक्षा बजट को मिला के। और क्या कोंगों के लोगों को कभी अपना पैसा वापिस मिलेगा? तो, इस सवाल का जवाब, और कौन इस में शामिल था और दरअसल क्या हुआ, शायद ये ताले में बंद रहेगा ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह के गोपनीय कंपनी रजिस्ट्रियों में और अनय स्थानों पे, अगर हम सब इसके बारे में कुछ करते नहीं हैं।

और तेल, गॅस और खनन कंपनियों का क्या? हो सकता है उनके बारे मे बात करना एक घिसी पिटी बात हो। उस व्यावसायिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है। जब हर तरफ भ्रष्टाचार है तो उस व्यावसायिक क्षेत्र पर ही क्यों ध्यान केन्द्रित किया जाए? इसका जवाब है कि क्योंकि यहाँ बहुत कुछ दाव पे लगा हुआ है। 2011 में प्रकृतिक संपदाओं का निर्यात आने वाली सहता राशि से लगभग 19 गुना थी अफ्रीका, एशिया और लटीनी अम्रीका में। उन्नीस गुना। इस से कितने सारे स्कूल और विश्वविद्यालय और अस्पताल और कारोबार शुरू किए जा सकते थे, जिन में से कई बने ही नहीं, और कभी बनेंगे भी नहीं, क्योंकि उस मे से कुछ पैसा चुरा लिया गया है।

अब वापस चलते हैं तेल और खनन कंपनियों कि ओर, और वापस दान एतेते और वह 100 करोड़ डॉलर के सौदे कि ओर। और माफ कीजिएगा, मैं अगला भाग पढ़ने जा रहा हूँ क्योंकि यह बहुत ही ज्वलंत मामला है, और हमारे वकील इसे गहराई से देख चुके हैं और वे चाहते हैं कि मैं इसमे कोई गलती ना करूँ।

अब, सतह पे तो यह सौदा सीधा सादा दिखता था। शैल और एनी कि सहायक कंपनियों नें निजेरियाई सरकार को उस ब्लॉक के लिए पैसे दिये। निजेरियाई सरकार नें ठीक उतनी ही रकम, आखरी डॉलर तक, एक फर्जी कंपनी के खाते में जमा करा दिये जिसका गुप्त तौर से मालिक एतेते था। अब, एक सजायाफ्ता पैसे का हेर फेर करने वाले के लिए ये कोई घाटे का सौदा नहीं था। और देखने वाली बात ये है। कई महीनों तक खोज बीन करने के बाद और हजारों पन्नों के अदालती दस्तावेज़ों को पढ़ने के बाद, हमे इस बात का सबूत मिला कि दरअसल शैल और एनी को यह पता था कि ये पैसा उस फर्जी कमापनी को दे दिया जाएगा, और सच कहें तो यह मान पाना कठिन है कि उन्हे पता नहीं था कि वो दरअसल किस से सौदा कर रहे थे।

अब, इतनी मेहनत लगनी ही नहीं चाहिए ये पता लगाने में कि ऐसे सौदों में पैसे कहाँ गए। मेरा मतलब है कि ये राज्य की संपाती हैं। उनका इस्तेमाल होना चाहिए देश के लोगों की भलाई के लिए। लेकिन कुछ देशों मे, नागरिक और पत्रकार जो ऐसे कांडों का पर्दाफाश करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हे तंग किया जा रहा है और हिरासत में लिया जा रहा है और कई लोगों ने तो इस के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाल दी।

और अंत में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो यह मानते हैं कि भ्रष्टाचार से बचा ही नहीं जा सकता। यही तरीका है जिस से कुछ व्यापार चलते हैं। इसको बदलना बहुत जटिल और मुश्किल है। तो इसका मतलब क्या है? हम इसे स्वीकार कर ले? पर एक प्रचारक और अन्वेषक होने के नाते मेरे विचार कुछ अलग हैं, क्योंकि मैंने देखा है कि क्या संभव है जब एक सोच गति पकड़ लेती है तो। तेल और खनन क्षेत्र में, उदाहरण के तौर पे, अब एक शुरुआत हो रही है सच्चे तौर पे विश्व व्यापी पारदर्शिता के मापदंड की जो की इस में से कुछ समस्याओं से निपट सकते हैं। 1999 में, जब ग्लोबल विट्नेस्स नें तेल कंपनियों को सौदों में भुगतान को पारदर्शी बनाने का आह्वान किया, तो कुछ लोग इसे भोलापन कह कर इस पर हंस रहे थे इस छोटे से विचार पर। लेकिन दुनिया भर से सैंकड़ों नागरिक समाज की संस्थाएं जुड़ गईं पारदर्शिता की लड़ाई में, और अब यह तेज़ी से आदर्श और कानून बनते जा रहा है। दो तिहाई मूल्य दुनिया की तेल और खनन कंपनियों का अब पारदर्शिता कानून के अंतर्गत आता है। दो तिहाई।

तो यह बदलाव हो रहा है। यह प्रगति है। लेकिन मंज़िल अभी बहुत दूर है। क्योकि यह मसला भ्रष्टाचार का नहीं है जो वहाँ, कहीं दूर है, है ना? वैश्विकृत दुनिया में भ्रष्टाचार सच में वैश्वीकृत कारोबार है, जिसे वैश्विक स्तर पे समाधान की ज़रूरत है, हम सभी वैश्वीय नागरिकों द्वारा समर्थित और प्रोत्साहित, ठीक यहीं पे।

धन्यवाद।

(तालियाँ)