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सवाल यह नहीं है आज: हमने अफगानिस्तान पर आक्रमण क्यों किया? सवाल यह है: हम क्यों अभी भी अफगानिस्तान में हैं एक दशक बाद? हम क्यों खर्च कर रहे हैं १३५ अरब डॉलर? हम जमीन पर क्यों 130.000 सैनिकों को रखे हैं? क्यों और अधिक लोग मारे गए थे पिछले महीने किसी भी पिछले महीने की तुलना में इस संघर्ष से? यह कैसे हुआ है? पिछले २० वर्षों हस्तक्षेप के वर्ष रहे हैं, और अफगानिस्तान बस एक है पांच कार्य त्रासदी में. हम शीत युद्ध के अंत के बाहर आये निराशा में. हमने रवांडा का सामना किया; हमें बोस्निया का सामना करना पड़ा; और तब हमने अपने आत्म विश्वास की खोज की. तीसरे , हम बोस्निया और कोसोवो में गए और हम सफल होने लगे. चौथे हमारे अभिमान के साथ , हमारे अति आत्मविश्वास में, हमने इराक और अफगानिस्तान पर आक्रमण किया. और पांचवें में, हम एक अपमानजनक गंदगी में कूद पड़े.
तो सवाल यह है: हम क्या कर रहे हैं ? हम अभी भी अफगानिस्तान में क्यों अटके हैं? और जवाब, ज़ाहिर है, कि हमें दिया जा रहा है निम्नानुसार है. हमें कहा गया की हम अफगानिस्तान गए ९/११ की वजह से, और हम वहाँ हैं क्योंकि तालिबान एक अस्तित्व का खतरा बना हुआ है वैश्विक सुरक्षा के लिए. राष्ट्रपति ओबामा के शब्दों में, यदि तालिबान फिर राज करने लगा , वे अल - कायदा को वापस आमंत्रित करेंगे, जो हमारे कई लोगों को मारने की कोशिश करेंगे जितना संभव हो." जो कहानी हमें कही गयी है कि वहाँ एक हल्का पदचिह्न था - दूसरे शब्दों में, हम एक ऐसी स्थिति में पहुच गए जहाँ हमारे पास पर्याप्त सैनिक नहीं थे, हमारे पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे, कि अफगान निराश थे. उन्होंने महसूस किया कि वहाँ पर्याप्त प्रगति नहीं थी और आर्थिक विकास और सुरक्षा, इसलिए तालिबान वापस आ गया. कि हमने २००५ और २००६ में जवाब दिया सेना की तैनाती के साथ , लेकिन हमने तब भी पर्याप्त सैनिकों को जमीन पर नहीं रखा. और २००९ तक भी नहीं थे, जब राष्ट्रपति ओबामा ने भारी उछाल पर हस्ताक्षर किए, अंत में, सचिव क्लिंटन के शब्दों में, रणनीति, नेतृत्व और संसाधनों, तोराष्ट्रपति अब हमें आश्वस्त करते हैं, की हम हमारे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अग्रसर हैं.
यह सब गलत है. उनका हर बयान गलत है. अफगानिस्तान नहीं है एक अस्तित्व का खतरा वैश्विक सुरक्षा के लिए. यह अत्यंत असम्भाव्निये है की तालिबान कभी भी देश पर राज करने लगेगा - बहुत असम्भाव्निये है की वे काबुल जब्त करने में सक्षम होगी. उनके पास एक पारंपरिक सैन्य विकल्प नहीं है. और अगर वे ऐसा करने में सक्षम हैं भी, यहाँ तक कि अगर मैं ग़लत हूँ, यह संभावना नहीं है तालिबान वापस अल - कायदा को आमंत्रित करेगा. तालिबान के परिप्रेक्ष्य से, यह उनकी सबसे बड़ी गलती थी. अगर उन्होंने अल कैदा को वापस आमंत्रित नहीं किया होता, वे अभी भी सत्ता में होते.
और यहां तक कि अगर मैं उन दो चीज़ों के बारे में गलत हूँ, भले ही वे वापस देश लेने के लिए सक्षम थे, भले ही वे वापस अल - कायदा को आमंत्रित करते हैं यह संभावना नहीं है कि अल - कायदा वृद्धि करेगा संयुक्त राज्य अमेरिका को नुकसान करने की क्षमता में या यूरोप को. क्योंकि यह १९९० का दशक के नहीं है . यदि अल - कायदा का आधार गजनी के पास स्थापित होगा , हम उन्हें बहुत करारी मार देंगे, और यह बहुत मुश्किल होगा तालिबान के लिए उन्हें बचाना.
इसके अलावा, यह सच नहीं है कि अफगानिस्तान में क्या गलत हुआ वोह था हल्का पदचिह्न. मेरे अनुभव में, वास्तव में, हल्का पदचिह्न बहुत ही मददगार है. और यह सैनिक जिन्हें हम लाये हैं डेविड बेकहम की एक महान तस्वीर हैं उप मशीन बंदूक पर - इसने स्थिति को बेहतर नहीं बदतर बना दिया. जब मैं अफगानिस्तान के पार गया २००१-२००२ की सर्दियों में, मैंने देखा इस तरह दृश्य. एक लड़की, अगर तुम भाग्यशाली हो, एक अंधेरे कमरे के कोने में - कुरान को देख पाने में भाग्यशाली. लेकिन उन शुरुआती दिनों में जब हमें कहा कि पर्याप्त सैनिक और पर्याप्त संसाधन नहीं है, हमने अफगानिस्तान में बहूत प्रगति की. कुछ महीनों के भीतर , वहाँ स्कूल में २५ लाख अधिक लड़कियां थी. Sangin जहाँ मैं २००२ में बीमार था, निकटतम स्वास्थ्य क्लिनिक तीन दिनों के पैदल रास्ते पर था. आज, वहाँ 14 स्वास्थ्य क्लीनिक हैं सिर्फ उस क्षेत्र में. वहाँ अद्भुत सुधार था. हम लगभग शुन्य अफगान तालिबान के दौरान, मोबाइल फोन वाले लगभग रातोंरात ऐसे स्थिति में थे, जहाँ ३० लाख अफगान मोबाइल टेलीफोन थे. और हमने स्वतंत्र मीडिया में प्रगति की. हमने चुनावों में प्रगति की - तथाकथित हलके पदचिह्न के साथ.
लेकिन, जब हमने अधिक पैसे लाने शुरू किये जब हम करने के लिए अधिक संसाधनों का निवेश करना शुरू किया, चीजें बेहतर नहीं बदतर हुई. कैसे? यदि आप 125 अरब डॉलर एक वर्ष में डाल दोगे अफगानिस्तान जैसे देश में जहां अफगान राज्य का पूरा राजस्व एक अरब डॉलर हर वर्ष है, आप सब कुछ डुबो दोगे. यह सरल भ्रष्टाचार और क्षय नहीं है आपके द्वारा ; आप अफगान सरकार की प्राथमिकताऐ बदल देते हो, निर्वाचित अफगान सरकार की, सुक्ष्म-ब्रबंधक प्रवृत्तियों के साथ विदेशियों के पर्यटन में उनकी अपनी प्राथमिकताओं के साथ. और सैनिकों के लिए भी यह सच है .
जब मैं अफगानिस्तान के पार गया, मैं इस तरह के लोगों के साथ रहा. यह हैं कमेन्न्ज से सेनानायक हाजी मलें मोहसिन खान सेनानायक हाजी मलें मोहसिन खान एक महान मेजबान था. वह बहुत उदार था कई अफगानियों की तरह जिनके साथ मैं रहा. लेकिन वह काफी अधिक रूढ़िवादी थे, काफी अधिक विदेश-विरोधी, काफी अधिक इस्लामवादी हमारे स्वीकार करने की तुलना में. उदाहरण के लिए, यह आदमी, मुल्ला मुस्तफा , ने मुझे मारने की कोशिश की. औरमैं इस तस्वीर में उलझन में इसलिए दिख रहा हूँ क्युकी मैं डर गया था, इस अवसर पर काफी डर गया था की उनसे पूछ न सका, की रेगिस्तान में एक घंटे चलाने के बाद और इनके घर में शरण लेने के बाद , वह क्यों बदल गए और मेरे साथ तस्वीर खिच्वानी चाही. लेकिन 18 महीने बाद, मैंने उनसे पूछा वह मुझे गोली मारने की कोशिश क्यूँ की. और मुल्ला मुस्तफा - कलम और काग़ज़ के साथ वह आदमी - ने मुझे समझाया कि वे आदमी जो आप के तुरंत बाये बैठा है, नादिर शाह ने उससे शर्त लगायी की वह मुझे नहीं मार सकते. अब इसका मतलब यह नहीं की अफगानिस्तान मुल्ला मुस्तफा जैसे लोगों से भरा है. यह एक बढ़िया जगह है, अविश्वसनीय ऊर्जा और बुद्धि से भरी. लेकिन यह एक जगह है जहां सैनिकों को डालना हिंसा को बदन है, न की गिराना.
2005, एंथोनी फित्ज्हेर्बेर्ट, एक कृषि इंजीनियर, हेलमंड के माध्यम से यात्रा करते हैं, नाद अली, संगीन और घोरेश में रह सकते हैं, जो अब वेह गांवों हैं जहां लड़ाई चल रही है . आज, वह ऐसा नहीं कर सकते. तो हमारा सैनिकों को तैनात करना तालिबान विद्रोह के जवाब में गलत है. उग्रवाद से फलने की बजाये, तालिबान सेना तैनाती के बाद आये. और जहाँ मैं चिंतित हूँ, सेना तैनाती उनकी वापसी का कारण बना.
अब यह एक नया विचार है? नहीं, कई लोगो ने पिछले सात वर्षों में यह कहा है. मैं हार्वर्ड में एक केंद्र चलता था २००८ से २०१० तक. और माइकल सेम्प्ले जैसे कई लोग वहाँ थे जो अफगान भाषा साफ़ बोलते हैं, जो देश में लगभग हर जिले में गए हैं . एंड्रयू वाइल्डर, उदाहरण के लिए, पाकिस्तान ईरानी सीमा पर पैदा हुए , अपने पूरे जीवन सेवा में थे पाकिस्तान और अफगानिस्तान में. पॉल फिश्स्तें जो १९७८ से वहाँ काम करते हैं - सेव डा चिल्ड्रन में, चलते थे अफगान अनुसंधान और मूल्यांकन इकाई. ये लोग हैं जो लगातार कहते थे कि विकास सहायता में वृद्धि अफगानिस्तान को कम सुरक्षित बना रही है, और अधिक सुरक्षित नहीं- कि आतंकवाद विरोधी रणनीति काम नहीं कर रही थी, न करेगी. और तब भी, किसी ने उनकी बात न सुनी . इसके बजाय, वहाँ आश्चर्यजनक आशावाद था.
२००४ में शुरू, हर सेनापति ने कहा, मैंने एक निराशाजनक स्थिति विरासत में ली है, लेकिन मेरे पास सही संसाधन और सही रणनीति है, जो वितरित करेगी. " २००४ में जनरल बरनो के शब्दों में, "निर्णायक वर्ष." सोचिये? यह नहीं था. लेकिन यह जनरल अबुजैद को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं था कहने से कि उनके पास रणनीति और संसाधन थे २००५ में वितरित करने के लिए, "निर्णायक वर्ष." या जनरल डेविड रिचर्ड्स २००६ में कहते हैं उनके पास रणनीति और संसाधन हैं वितरित करने के लिए "मुश्किल वर्ष में" या २००७ में, नार्वेजियन उप विदेश मंत्री, एस्पेन एइडे, कि वह "निर्णायक वर्ष." में वितरित करेंगे या २००८ में, मेजर जनरल चम्पौक्स आते हैं और कहते हैं कि वे उद्धार करेंगे "निर्णायक वर्ष." में या २००९ में, मेरे महान दोस्त, जनरल स्टेनली म्च्चर्य्स्तल, जो कहते हैं कि वह "निर्णायक वर्ष में घुटने तक डूबे थे . " या २०१० में, ब्रिटेन के विदेश सचिव, डेविड मिलिबंद, जो कहते हैं कि वह उद्धार करेंगे "निर्णायक वर्ष में." और आप २०११ में सुन कर खुश होंगे, की आज, कि गुइदो वेस्तेर्वेल्ले, जर्मन विदेश मंत्री हमें भरोसा दिलाते हैं कि हम हैं "निर्णायक वर्ष ." में
हम कैसे अनुमति दें इस में से कुछ भी होने के लिए? जवाब, ज़ाहिर है, अगर आप 125 अरब या 130 अरब खर्च करते हैं एक देश में एक साल में, आप हर चीज़ में भागिदार हैं, हर सहायता एजेंसि - जो पैसे का एक विशाल राशि प्राप्त करती है अमेरिका और यूरोपीय सरकारों से स्कूलों और क्लीनिकों का निर्माण करने के लिए - वह कुछ हद तक विमुख हैं इस विचार से कि अफगानिस्तान एक अस्तित्व खतरा नहीं है वैश्विक सुरक्षा के लिए. वे, दूसरे शब्दों में चिंतित हैं, कि अगर किसी ने माना कि यहएक खतरा नहीं है - ऑक्सफेम, सेव डा चिल्ड्रन - को पैसे नहीं मिलेंगे उनके अस्पतालों और स्कूलों के निर्माण के लिए . और मुश्किल है सेनापति का सामना करना उसकी छाती पर पदक के साथ . यह एक राजनीतिज्ञ के लिए बहुत मुश्किल है , क्योंकि आप को डर है कि कई जीवन व्यर्थ में खो गए हैं. आपको गहरा अपराध लगता है. तुम अपने डर को बड़ा चड़ा के बताते हैं. और आप अपमान के बारे में डर रहे हैं हार के.
इस का हल क्या है? इस का हल है कि हम एक रास्ता खोजे माइकल सेम्प्ले के जैसे लोग, या उन से अन्य लोग, जो सच कह रहे हैं, जो देश को जानते हैं, जिन्होंने जमीन पर 30 साल बिताये हैं- और सबसे महत्वपूर्ण बात, इस घटक से लापता - खुद अफगान, जो समझते हैं कि क्या हो रहा है. हम किसी भी तरह उनका संदेश पहुचाना है नीति निर्माताओं तक. और यह करना बहुत मुश्किल है हमारी संरचनाओं के कारन.
पहली बात हम बदंलनी है हमारी सरकार की संरचना. बहुत, बहुत दुख की बात है, हमारे विदेशी सेवाएँ, संयुक्त राष्ट्र, इन देशों की सेनाए को कम विचार है की क्या हो रहा है. औसत ब्रिटिश सैनिक केवल छह महीने दौरे पर है; इतालवी सैनिकों, चार महीने टूर पर; अमेरिकी सैन्य, 12 महीने टूर पर. राजनयिकों दूतावास यौगिकों में बंद हैं. जब वे बाहर जाते हैं, वे इन उत्सुक बख्तरबंद वाहनों में यात्रा करते हैं इन कुछ धमकी भरी सुरक्षा टीमों के साथ जो अग्रिम में तैयार हैं २४ घंटे जो कहते हैं कि तुम केवल एक घंटे जमीन पर रह सकते हो.
अफगानिस्तान में ब्रिटिश दूतावास में २००८ में, ३५० लोगों के एक दूतावास में, वहाँ केवल तीन लोग दारी बोलते थे, अफगानिस्तान में एक सभ्य स्तर पर, मुख्या भाषा. और वहाँ एक भी पश्तो वक्ता नहीं था. लंदन में अफगान अनुभाग में जमीन पर अफगान नीति शासित करने की लिए जिम्मेदार, मुझे पिछले साल कहा गया कि वहाँ एक भी स्टाफ सदस्य नहीं था उस अनुभाग में विदेश कार्यालय में जिसने कभी सेवा की हो अफगानिस्तान में पोस्टिंग पर. तो हमें यह संस्थागत संस्कृति को बदलने की जरूरत है. और मैं संयुक्त राज्य अमेरिका के बारे में यही आकलन करता हूँ और संयुक्त राष्ट्र.
दूसरे, हम जनरलों के आशावाद से दूर जाने की जरूरत है. हमें थोडा बहोत शक बनाने की जरूरत है, कि हम समझे की वह आशावाद सेना के डीएनए में है, कि हम इसे न उत्तर दें इतनी तत्परता के साथ . और तीसरे, हमें कुछ विनम्रता की जरूरत है. हमें ऐसी स्थिति से शुरू करने की जरूरत है कि हमारा ज्ञान, हमारी शक्ति, हमारे वैधता सीमित है. इसका मतलब यह नहीं कि दुनिया भर में हस्तक्षेप एक आपदा है. ऐसा नहीं है.
बोस्निया और कोसोवो सफलताएँ थीं, महान सफलता. आज जब आप बोस्निया जायेंगे यह लगभग असंभव है विश्वास करना कि १९९० के दशक में हमने जो देखा . यह लगभग असंभव है विश्वास करना प्रगति पर १९९४ के बाद से. रिफ्यूजी की वापसी, जो शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायोग सोचा था कि असंभव होगी, बड़े पैमाने पर हुई है . एक लाख संपत्ति लोटाई गयी है. बोस्निअक क्षेत्र के बीच बॉर्डर और बोस्नियाईसर्ब क्षेत्र शांत है. राष्ट्रीय सेना सिकुड़ गई है. बोस्निया में अपराध दर आज स्वीडन से कम है.
यह किया गया है एक अविश्वसनीय, सैद्धांतिक प्रयास के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा, और, ज़ाहिर है, सब से ऊपर बोस्निंस द्वारा स्वयं. लेकिन आप को संदर्भ में देखने की जरूरत है. और यह हमने अफगानिस्तान और इराक में खो दिया है. आप उन स्थानों में समझें क्या महत्त्वपूर्ण था सबसे पहले, तुद्मन और मिलोसेविक की भूमिका समझौते में, और फिर तथ्य की वह पुरुष गए, क्षेत्रीय स्थिति सुधारने में , कि यूरोपीय संघ बोस्निया की पेशकश कर सकता कुछ असाधारण: हिस्सा बनने का मौका एक नया क्लब का, कुछ बड़े में शामिल होने का.
और अंत में, हमें समझना चाहिए की बोस्निया और कोसोवो में, रहस्य की बात है, हमारी सफलता का रहस्य, थी हमारी विनम्रता - हमारी सगाई की अस्थायी प्रकृति. हम लोगों ने बोस्निया की बहुत आलोचना की युद्ध अपराधियों काफी धीमी गति से कार्यवाही के लिए. हमने उनकी आलोचना की शरणार्थियों को लौटने में धीमी गति के लिए. लेकिन यहसुस्ती, यह सावधानी, यह तथ्य कि राष्ट्रपति क्लिंटन ने शुरू में कहा कि अमेरिकी सैनिकों केवल एक वर्ष के लिए तैनात किये जायेंगे, एक ताकत बन गया है , और इसने हमें हमारी प्राथमिकताओं को सही करने में मदद की.
सबसे दुखद बात अफगानिस्तान में हमारी भागीदारी के बारे में यह है की प्राथमिकताओं मेल से बहार हैं. हम अपने संसाधनों को हमारी प्राथमिकताओं से नहीं मिला रहे हैं . क्योंकि अगर हमें आतंकवाद में रुचि है, पाकिस्तान अफगानिस्तान की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है. यदि हमें क्षेत्रीय स्थिरता में रुचि है, मिस्र कहीं अधिक महत्वपूर्ण है. अगर हमें गरीबी और विकास की चिंता है, उप सहारा अफ्रीका कहीं अधिक महत्वपूर्ण है. इसका मतलब यह नहीं है कि अफगानिस्तान से फर्क नहीं पड़ता, लेकिन वेह दुनिया के 40 देशों में से एक है जिसके साथ हमें संलग्न की जरूरत है.
तो अगर मैं हस्तक्षेप के लिए एक रूपक के साथ समाप्त करता हूँ, हम जिस बारे में सोच सकते हैं है पहाड़ बचाव की तरह कुछ. पहाड़ बचाव क्यों? क्योंकि, जब लोगहस्तक्षेप के बारे में बात करते हैं वे कल्पना करते हैं कुछ वैज्ञानिक सिद्धांत की - रेंड निगम 43 पिछले विद्रोह गिनता है गणितीय सूत्रों का निर्माण कर यह कह की आप को एक प्रशिक्षित काउंटर-विद्रोही की जरूरत है आबादी के हर 20 सदस्यों के लिए. यह इसे देखने का गलत तरीका है. आप इसे पहाड़ बचाव की तरह देखने की जरूरत है.
जब आप पहाड़ बचाव करते हैं, आप पहाड़ बचाव में डॉक्टरेट नहीं लेते, आप किसी जानने वाले को ढूँढ़ते हो. यह संदर्भ के बारे में है . आप समझते हैं कि आप तैयार कर सकते हैं, लेकिन जितनी तैयारी आप कर सकते हैं सीमित है. आप कुछ पानी और एक नक्शा ले सकते हैं , आप एक बस्ता ले सकते हैं. लेकिन क्या सचमुच मायने रखता है हैं दो प्रकार की समस्याएं - समस्याएं जो पहाड़ों पर होती हैं जो आप प्रतिआशा नहीं कर सकते, उदाहरण के लिए, एक ढलान पर बर्फ , लेकिन जिन्हें आप समझ सकते है , और समस्याएं जिनकी आप आशा नहीं कर सकते और जिन्हें आप समझ नहीं सकते है, अचानक आया एक बर्फानी तूफान या एक हिमस्खलन या मौसम में परिवर्तन.
और इसकी कुंजी एक गाइड है जो कि पहाड़ पर गया है , हर तापमान में, हर अवधि में - एक गाइड, जो, जानता है कि कब वापस मुड़ना है, जो लगातार आगे नहीं बढेगा जब स्थिति उनके खिलाफ हो. हम क्या ढूँढ़ते हैं फायरब्रिगेड वालों में, पर्वतारोहियों में, पुलिसकर्मियों में, और हमें हस्तक्षेप के लिए क्या ढूदना चाहिए , है बुद्धिमानी से जोखिम उठाने वाले ऐसे लोग नहीं, जो चट्टान से अंधी में कूद जाते हैं ऐसे लोग नहीं, जो एक जलते हुए कमरे में कूद जाएं, लेकिन जो अपने जोखिम नापते हैं, अपनी जिम्मेदारिया तौलते हैं. क्योंकि हमने अफगानिस्तान में सबसे बुरा जो किया है है यह विचार कि विफलता एक विकल्प नहीं है. यह विफलता को अदृश्य बनाता है , समझ से बाहर है और अपरिहार्य है. और अगर हम विरोध कर सकते हैं इस पागल नारे का, हमें पता चलेगा - सीरिया में, मिस्र में, लीबिया में, और कहीं और हम दुनिया में जाएँ - कि अगर हम अक्सर जितना दिखाते हैं उससे कम करें, हम अपने दर से कही अधिक कर सकते हैं.
धन्यवाद. बहुत बहुत धन्यवाद. धन्यवाद. बहुत बहुत धन्यवाद. धन्यवाद. धन्यवाद. धन्यवाद.
धन्यवाद. धन्यवाद. धन्यवाद. धन्यवाद.
ब्रूनो गिउस्सानी: रोरी, तुमने अंत में लीबिया का उल्लेख किया है. संक्षेप में, वर्तमान घटनाओं पर अपने विचार बताओ और हस्तक्षेप पर?
रोरी स्टीवर्ट: ठीक है, मुझे लगता है कि लीबिया उत्कृष्ट समस्या है. लीबिया में समस्या है कि हम हमेशा पूर्ण काले या सफेद के लिए जोर दे रहे हैं . हमारी कल्पना में वहां केवल दो विकल्प हैं: या तो पूर्ण कार्य और सेना तैनाती या पूर्ण अलगाव. और हम हमेशा लालच में हैं. हम अपने पैर की उंगलिया डालते हैं और हमारी गर्दन फस जाती है. हमें लीबिया में क्या करना चाहिए था हमें संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर रुकना चाहिए था. हमें खुद को बहुत, बहुत सख्ती से सीमित करना चाहिए था बांघज़ी में नागरिक आबादी के संरक्षण के लिए. हम वह कर सकते थे. हमने ४८ घंटे के भीतर उड़ान प्रतिबंधित क्षेत्र बना दिया था क्योंकि गद्दाफी के पास कोई विमान नहीं थे ४८ घंटे के भीतर. इसके बजाय, हमने खुद को लालच में आने दिया है शासन परिवर्तन की दिशा में. ऐसा करने में, हमने सुरक्षा परिषद में हमारी विश्वसनीयता को नष्ट कर दिया है, जिसका मतलब है कि यह बहुत मुश्किल है सीरिया पर एक प्रस्ताव प्राप्त करना, और हम एक बार फिर विफलता न्योत रहे हैं. एक बार और, विनम्रता, सीमाएं, ईमानदारी, यथार्थवादी उम्मीदें और हम कुछ गौरवपूर्ण हासिल कर सकते थे.
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ब्रिटिश सांसद रोरी स्टीवर्ट 9 / 11 के बाद अफगानिस्तान के पार चल कर गए, नागरिकों और सरदारों के साथ एक जैसे बात करते हुए. अब, एक दशक बाद, वह पूछते हैं: पश्चिमी और गठबंधन सेनाएं अभी भी वहाँ क्यों लड़ रही हैं? वह पहले की सैन्य हस्तक्षेप की सीख बताते हैं -- बोस्निया, उदाहरण के लिए - और दिखाते हैं की विनम्रता और स्थानीय विशेषज्ञता सफलता की चाबियाँ हैं.
Rory Stewart -- a perpetual pedestrian, a diplomat, an adventurer and an author -- is the member of British Parliament for Penrith and the Border. Full bio »
Translated into Hindi by Gaurav Gupta
Reviewed by Anshul Tyagi
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The last 20 years has been the age of intervention, and Afghanistan is simply one act in a five-act tragedy.” (Rory Stewart)
18:45 Posted: Oct 2006
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20:38 Posted: Sep 2010
Views 121,223 | Comments 99
17:36 Posted: Sep 2007
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