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मैं ये कह कर शुरु करना चाहूँगा, कि ह्यूस्टन, हम मुश्किल में हैं. इन्सान की अंतरिक्ष यात्रा को लेकर हम ठहराव की दूसरी पीढ़ी में पहुँच रहे हैं. सच्चाई ये है कि हम पीछड़ गए हैं . हम बहुत बड़ा मौका गँवाने वाले हैं अपने युवाओं को प्रेरित करने का, जिससे कि वो इस बहुत ही महत्वपूर्ण काम को जारी रख सकें जो कि हमने मानव होने के नाते हमेशा किया. हम बड़ी सहजता से निकल पड़े और मुश्किल चढ़ाईयाँ लांघ ली, दुर्गम से दुर्गम स्थान तक पहुँच गए, और बाद में, हैरत के साथ महसूस किया, कि यही तो हमारे जीने का मकसद था. मैं बड़ी शिद्दत से महसूस करता हूँ कि ये बिल्कुल सही नहीं है कि हम बच्चों की ऎसी पीढ़ियाँ बनाँए जिनकी अपेक्षाँए वीडियो वाले बेहतर सेल-फोन तक सीमित हों. उन्मे अनुस्न्धान की इच्छा होनी चाहिए, संगठित होने की सोच होनी चाहिए, नई खोज के लिए उत्सुकता होनी होगी. ये इन बच्चों के लिए ज़रूरी है. हमें उन्हे प्रोत्साहित करना होगा, क्योंकि वे ही आगे रहकर भविष्य में हमारा अस्तित्व बनाए रखने में भूमिका निभाएंगे.
नासा नए बुश सिद्धांतो को लेकर अभी जो कर रही है, उससे मुझे बेहद परेशानी है, जिससे कि- अगले डेढ़ दशक का समय - ओह, मैंने गड़ब़ड़ कर दि. हमें ख़ास हिदायत दी गई थी कि हम यहाँ राजनीति पर चर्चा ना करें.
तो हम जो उम्मीद कर रहे हैं वह सिर्फ हमारे बच्चों का प्रोत्साहन ही नहीं है, बल्कि अभी योजना यह भी है कि कैसे इस देश के सबसे रचनात्मक लोग -- बोईंग और लॉकहीड के स्पेस इंजीनियरों को नई चुनौति और नए प्रयोगों से रोका जा सके. हम चाँद पे फिर से जा रहे हैं -- 50 साल बाद -- पर जा रहे हैं नया कुछ ना सीखने की विशिष्ट योजना लेकर. मुझे इस बात से बड़ी परेशानी होती है. वैसे भी -- मैं आज आपसे जो बातें करना चाहता हूँ वो इसी मुद्दे पर आधारित हैं, कि हम कैसे उन लोगों को प्रभावित करते हैं जो कि भविष्य में हमारे महान नेता बनेंगे. मेरे अगले 15 मिनटों की बातों का विषय यही है. मुझे लगता है प्रेरणा की शुरुवात बहुत बचपन से होती है; तीन-साल-की उमर, 12 साल तक, 14 साल की उमर. जो हम -- वो क्या देखते हैं, यही सबसे महत्वपूर्ण है.
चलिए वायु-यात्रा की एक झलक लेते हैं. एक छोटा सा समयकाल था, शानदार चार सालों का, जिनमें ग़ज़ब की चीज़ें हुंई. इसकी शुरुवात 1908 मैं हुई, जब राईट बंधुओं ने पैरिस में उड़ान भरी, और सभी ने कहा, 'ओह, ये तो हम भी कर सकते हैं.' बहुत ही गिने-चुने लोग 1908 के शुरुवात में उड़ान भर सकते थे. अगले चार सालों में 39 देशों के पास सैंकड़ों हवाई जहाज़ थे, और हज़ारों विमान चालक. हवाई जहाज़ों का आविष्कार एक स्वाभाविक प्रक्रिया के तहत हुआ. आप आज ये कह सकते हैं कि सूक्ष्म डिज़ाईनों के ज़रीए हमारे आज के वायु-यान डिज़ाईन किए जाते हैं, लेकिन वायु-यानों के उन पहले दिनों में ऎसे सू़क्ष्म डिज़ाईन उपलब्द्ध नहीं थे. कम से कम 30,000 अलग अलग चीज़ें आज़माई गई होंगी, और उनके क्रैश होने और विमान चालक की मौत के बाद ही ये समझ आया होगा कि ये तरीक़ा नहीं चलेगा. कुछ वायु-यान उड़े और ठीक-ठाक उतर भी सके पर उनमे भी कोई प्रशिक्षित चालक नहीं होते थे जिन्हे वायु-यान उड़ाने का सही तरीक़ा पता हो. तो हमने, हज़ारों बार कोशिश करते करते, उन चार सालों में वह सारे सिद्धान्तों का आविष्कार किया जिनकी बदौलत आज हम विमान चलाते हैं. वायु-यात्रा इसी कारण सुरक्षित बन पाई, क्योंकि हमने क्या सही है, ये पता लगाने के लिए काफी़ प्रयोग किए. पर अंतरिक्ष में उड़ान भरने के मामले में ऎसा नहीं हुआ. सिर्फ दो ही सिद्धान्तों का परीक्षण किया गया -- अमरीकियों द्वारा दो और रूसियों द्वारा एक.
तो बताईए, उस समय इस विषय पर किन लोगों ने उत्साह दिखाया था? 'एवियेशन वीक' ने मुझे एक सूचि बनाने का काम दिया जिसमें मुझे हवाई उड़ान के पहले 100 वर्षों में मुख्य भूमिका निभाने वालों को चुनना था. मैंने सूचि बनाई और बाद में पाया कि उन में से हर किसी का बचपन हवाई यात्रा में जागरण के उस अद्भुत समयकाल में बीता था. ख़ैर, जब मैं बच्चा था, तब भी कुछ महत्वपूर्ण चीज़ें घटीं. जेट युग शुरु हुआ, मिसाईल युग का प्रदुर्भाव हुआ. वॉन ब्रौन ने मंगल ग्रह पर जाने की तरकी़ब बताई -- ये सब स्पुटनिक के पहले की बात है. और अस समय मंगल को लेकर आज से ज़्यादा कौतुहल था. हमें लगता था वहाँ जानवर होंगे, हम लगभग जानते थे कि वहाँ पौधे भी मिलेंगे, अलग रंगों के, है ना? पर क्या करें, नासा ने पूरा मामला ही गड़बड़ कर दिया, रोबोट तो भेजे लेकिन उन्हे उतारा केवल रेगिस्तानों में!
अगर आप देखें -- ये छोटी काली रेखा दर्शाती है कि इंसान ने कितनी रफ्तार से उड़ान भरी, ये लाल रेखा सबसे अच्छे मिलिटरी विमानों को दर्शाती है और ये नीली रेखा व्यवसायिक हवाई यातायात की है. आप देख सकते हैं कि यहाँ एक बड़ा उछाल है. जब मैं छोटा था -- मुझे लगता है कि कहीं तो इस बात ने मुझे हिम्मत भी जुगाई कि मैं निकल पड़ूँ और ऎसा कुछ करूँ जिसे करने की हिम्मत अब तक किसी ने नहीं दिखाई हो. तो, बचपन में मैंने ऎसा क्या किया? मैं तेज़ गाड़ियों, लड़कियों या डिस्को के पीछे नहीं भागता था. उन दिनों ड्रग्स नहीं मिला करते थे. पर मैंने वायु-यान के मॉडलों की प्रतियोगिताओं में भाग लिया. मैंने क़रीब सात साल ग़ुज़ारे वियेतनाम युद्ध के दौरान वायु सेना के यानों की उड़ान-क्षमता का परीक्षण करते हुए. इसके बाद मैंने बड़े मज़े से ऎसे प्लेन बनाने लगा जिन्हे लोग अपने गैरेज में ही जोड़ सकते थे. उनमें से क़रीब 3,000 उड़ान भर रही हैं. हाँ, 'अराऊन्ड द वर्ल्ड वॉयेजर भी उन्ही विमानों में से एक है. मैंने सन '82 में एक और कंपनी की स्थापना की, जो अब मेरी कंपनी है. हमने 1982 से लेकर हर साल एक से ज़्यादा नई तरह के वायु-यान बनाए हैं. उनमें से बहुत से ऎसे हैं जिन्हे मैं इस चार्ट पर नहीं दिखा सकता.
मेरे हिसाब से किसी वायु-यान का अब तक का सबसे प्रभावशाली नक्शा जेट विमानों के चालु होने के सिर्फ 12 साल बाद बन गया था. इसे ज़ंग पड़ कर उड़ने के नाक़ाबिल हो जाने तक सेवा में रखा गया, फिर हटा दिया गया. '98 में हम '56 में विकसित की हुई चीज़ को वापस ले आए. क्या? सबसे शानदार अंतरिक्ष यान, मेरे हिसाब से, ग्रुम्मान लुनर लैण्डर थी. ये-- जैसा की आप जानते हैं, चाँद पर उतरी, चाँद से वापस आई, और इसे रख-रखाव की ज़रूरत नहीं पड़ी -- कमाल की बात है. हमने वो क्षमता खो दी है. हमने सन '72 में ही उसका त्याग कर दिया था. इसका नक्शा 1961 में गैगारिन की पहली अंतरिक्ष यात्रा के तीन साल बाद बनाया गया था. सिर्फ तीन सालों में, और आज हम वो नहीं कर पा रहे जो हमने तब किया.
अजीब बात है. अगर हम नवप्रवर्तन चक्रों की चर्चा करें, तो ज़ोर पकड़ने वाली विचारधाराएँ भी दूसरी विचारधाराओं से प्रतिस्थापित होकर लुप्त हो जाति हैं. यह परिवर्तन हर 25 साल में होता है, 40 साल लंबे अंतरछादित चक्रों में. यह सिद्धांत सभी तरह की तकनीकों पर लागु होता है. इसमें ध्यान देने वाली बात -- यानी गति, माफ कीजिए, तीव्र-गति से यात्रा इन प्रवर्तन चक्रों का शीर्षक है. यहाँ ऎसा कुछ भी नही़ है. इन दो नये विमानों की गति उतनी ही है जितनी 1958 के DC8 की. मुद्दे की बात यह है कि ये प्रवर्तन चक्र आपको उपलब्द्ध नहीं होंगे अगर सरकार ही उन्हे बनाए और सरकार ही उनका प्रयोग करे. इसका सबसे अच्छा उदाहरण है 'DARPA नेट' (प्राथमिक नेटवर्क जिससे आजके ईंटरनेट का विकास हुआ) कंप्युटरों का पहले इस्तेमाल युद्ध सामग्रीयों के लिए किया गया, फिर IRS (करारोपण और कर संग्रहण देखने वाली अमरीकि सरकारी एजेन्सी) के लिए. पर जब हमें वो मिली, तो हमने हर कार्य क्षेत्र में उसका पूरा लाभ उठाया. ये काम निजी क्षेत्र का होता है. ये ध्यान में रखियेगा. मैंने प्रवर्तन को-- मैंने अंतरिक्ष के विषय पर प्रवर्तन चक्रों की खोज की, और मुझे कुछ नहीं मिला.
उसी साल जिस साल गैगारिन ने अंतरिक्ष यात्रा की, और उसके चंद हफ्तों बाद एलन शेफर्ड ने भी, पूरे विश्व से पाँच मानव चालित यान अंतरिक्ष में छोड़े गए थे, पहले ही साल में. 2003 में अमरीका ने जितने भी व्यक्ति अंतरिक्ष में भेजे, सभी मारे गए. 2003 में केवल तीन या चार उड़ाने भरी गईं थी. 2004 में, केवल दो उड़ानें भरी गईं : दो रूसी सोयूज़ विमान जो कि अंतर्राष्ट्रिय मानव चालित स्टेशन में भेजी गईं. पर मुझे मोहावे में तीन उड़ानें अपने चौबीस लोगों के छोटे से दल को लेकर भरनी पड़ी ताकि कुल उड़ानों की संख्या पाचँ तक पहुँच सके, जो कि 1961 में भरी उड़ानों के बराबर था. कोई बढ़ौतरी नहीं. कोई हलचल नही. कुछ भी नहीं.
ये 'स्पेस शिप वन' से खींची हुई तस्वीर है. इस तस्वीर को औरबिट (अंतरिक्ष यान का कक्षपथ) से खींचा गया. हमारा उद्देश्य यह है कि हम वहाँ तक पहुँच सकें ताकि आप इस तस्वीर का आनंद उठा सकें. आज हम कक्षाओं से नीचे भी सुरक्षित उड़ान भर सकते हैं. कम से कम पहले दौर के वायु-यानों में उड़ान जितनी सुरक्षा के साथ. अब मैं यह् बताना चाहूँगा कि कैसे एक छोटी कंपनी होने के बावजूद हमने हिम्मत दिखाई.
तो, आगे क्या होने वाला है? उद्योग के शुरुवाती दौर में काम की मात्रा अधिक होगी, और उद्योग में निवेश करने वालों की भी. पिछले हफ्ते ही एक और नए निवेश की घोषणा हुई. और ये सब कक्षा के नीचे उड़ने वाली उड़ानों के लिए होगा. ऎसा इसलिए होगा, क्योंकि हमारे पास सुरक्षा के पर्याप्त साधन नहीं हैं जिससे हम आम जनता को कक्षाओं में उड़ान भरवा सकें. ये काम सरकार कर रही है -- तीन सरकारें 45 सालों से कर रही हैं, फिर भी वायुमण्डल के बाहर जाने वाले चार फिसदी लोगों की मौत हुई है. तो -- आप सुरक्षा के ऎसे परिणाम लेकर व्यवसाय चलाना नहीं चाहेंगे. यह व्यवसाय बड़े पैमाने का होगा, हमें लगता है कि 2020 तक क़रीब 1,00,000 लोग ऎसी उड़ानें भरेंगे. ये कब शुरु होगा मैं आपको नहीं बता सकता, क्योंकि मैं अपने प्रतिद्वन्द्वियों को मेरे कार्यक्रम की जानकारी नहीं देना चाहूँगा. पर मुझे लगता है कि एक बार ये शुरु हो जाए, हमें रास्ते मिलने लगेंगे. और बहुत जल्द, आपको कक्षा में ही होटल, रिसॉर्ट मिलने लगेंगे. बहुत आसानी से आप चाँद का चक्कर लगा कर उसके नज़ारे का आनंद उठा पाएंगे. बहुत दिलचस्प मामला होगा. चूँकि चाँद में वायुमण्डल नहीं है -- आप चाहें तो उससे सिर्फ 10 फीट की दूरी पर उसकी अण्डाकार परिक्रमा भी लगा सकते हैं. ओह, बड़ा मज़ा आएगा.
ओके. मेरे आलोचक कहते हैं कि 'ये रूटान तो बस अमीरों के पैसों से अमीरों के मौज का सफर जुटाने में लगा है. ये सब है क्या? ये कोई सफर का ज़रीया नहीं, बल्कि केवल मनोरंजन का साधन है." मुझे ये सुनकर तक़लीफ होती थी, पर तब मैंने सोचा, एक मिनट. मैंने अपना पहला एपल कंप्युटर 1978 में ख़रीदा था और इसलिए ख़रीदा था ताकि मैं कह सकूँ कि, "मेरे घर में कंप्युटर है और तुम्हारे घर नहीं. "आप उससे क्या करते हैं?" आई देखिए. उससे फ्रॉगर (एक कंप्युटर गेम) खेल सकते हैं." ओके.
बैंक या लौकहीड का कंप्युटर नहीं, घर का कंप्युटर सिर्फ गेम्स खेलने के लिए था. एक पूरे दशक तक कंप्युटर सिर्फ मनोरंजन के लिए था -- हमें ये भी नहीं पता था कि इसका क्या इस्तेमाल हो. पर इसके बाद जो हुआ, हम जो इतना बड़ा उद्योग खड़ा कर पाए, ज़्यादा विकास, बड़े सुधार, अधिक सक्षमता, और भी ऎसा बहुत कुछ, और जैसे जैसे कंप्युटर ज़्यादा से ज़्यादा घरों में पहुँचने लगा, उसने हमें नए आविष्कारों के लिए तैयार कर दिया. और ये आविष्कारक इन श्रोताओं में से कोई भी हो सकता है. अल गोर ने इंटरनेट का आविष्कार किया और उसी की वजह से, जिसका की हमने पूरे एक साल -- माफ कीजिएगा, जिसका पूरे एक दशक तक हमने सिर्फ मनोरंजन के इस्तेमाल किया, हमारा सब कुछ बन गया -- हमारा वाणिज्य, हमारा अनुसंधान, हमारा संपर्क-साधन और, अगर गुगल के लोगों को बस दो हफ्ते और सोचने दें, तो इस सूची में दर्जन भर चीज़ें और जुड़ जाएँगी. जल्द ही ऎसे दिन भी आएँगे जब हम बच्चों को विश्वास नहीं दिला पाएँगे कि हमेशा हमारे घरों में कंप्युटर नहीं हुआ करते थे. तो, मनोरंजन का समर्थन किया ही जा सकता है.
ओके, मैं अब आपको एक व्यस्त सा चार्ट दिखाना चाहूँगा, जिसमें कि मैंने बताने चाहा है कि भविष्य में क्या होने वाला है. और यहाँ ये अपने साथ एक विषय और सामने लाता है. कुछ लोग हैं जो आगे आए हैं -- आप उनमें से हर किसी को नहीं जानते -- पर जो लोग सामने आए हैं उन्हें उनके बचपन में, यही, तीन से 15 साल की उमर में हमारे उस दौरान की अंतरिक्ष और चाँद की यात्रा से प्रेरणा मिली थी पॉल ऎलेन, एलान मस्क, रिचार्ड ब्रैन्सन, जेफ बेज़ोस, अन्सारी परिवार जो कि अब रूसी उप-कक्षाओं की उड़ानों के लिए आर्थिक मदद दे रहे हैं. बॉब बिजेलौ, एक निजी स्पेस स्टेशन और कार्माक. ये लोग पैसे लेकर उसे एक दिलच्स्प क्षेत्र में लगा रहे हैं, जो मेरे हिसाब से किसी बेहतर सेल-फोन या ऎसी किसी चीज़ में लगाने से अच्छा है -- पर ये इसे बहुत ही [अस्पष्ट] क्षेत्रों में लगा रहे हैं जो हमें इतना क़ाबिल बना देगी, कि हम अगली बड़ी सीढ़ी तक पहुँच सकें, और नए आयामों को ढूँढ सकें. मुझे लगता है, कालांतर में संघबद्ध होने में और अवलुप्ति से बचने में भी सहायक होगी.
ये लोग बड़ी उन्नतियों से प्रेरित हुए थे. पर ज़रा उस समय के बाद हुए विकास को देखिए. यहाँ दो उदाहरण देखे जा सकते हैं. मिलिटरी सैनिकों के पास सबसे बेहतरीन मिलिटरी विमान SR71 था. इस विमान ने अपना जीवन चक्र पूरा किया, पुराना होकर उड़ने के अयोग्य हो गया, और तब इसे सेवा से हटा दिया गया. कॉनकार्ड ने हवाई यात्रा की गति को दुगना कर दिया. उसने अपना पूरा जीवन-चक्र बिना प्रतिस्पर्धा के पूरा किया; और फिर उसे सेवा से हटा लिया गया. और आज भी हम मिलिटरी विमानों की वही पुरानी क्षमता पर ठहरे हुए हैं, उसी व्यवसायिक हवाई यात्रा पद्धति का उपयोग कर रहे हैं जो हम '50 वी दशक के आखिर में किया करते थे.
पर आज हमारे बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए हमारे पास कुछ नया है. चाहे आपका बच्चा एकदम शिशु हो या 10-साल तक की उमर तक का. कुछ बहुत ही अद्भुत चीज़ें होने वाली हैं. जल्द ही, आप टिकट ख़रीद कर आज के सबसे अच्छे मिलिटरी विमानों से ज़्यादा ऊँची और ज़्यादा तेज़ उड़ान भर सकेंगे. ऎसा पहले कभी नहीं हुआ. अपनी कार्य-क्षमता को एक स्तर पर लाकर ठहर जाने की वजह यही (सोच) है कि भई, अगर आप 12 मिनट में कोई युद्ध जीत सकते हैं, तो इससे बेहतर करने की ज़रूरत क्या है? पर जब आप लोग टिकट ख़रीद कर अंतरिक्ष में कक्षा से नीचे की उड़ाने भरने लगेंगे, बहुत ही जल्द -- एक मिनट, देखिए, हमारे पास कक्षा से नीचे उड़ने वाले मिलिटरी विमान भी होंगे और बहुत ही जल्द ये सुविधा भी. पर इसमें ग़ौर करने वाली बात ये है, कि पहले व्यवसायिक लोग ये काम करेंगे. ओके, मैं उम्मीद कर रहा हूँ एक ऎसे दौर की, जिसे चाहे तो आप नया 'पूँजिवादी अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा' कह सकते हैं.
आप को याद होगा, '60 के द्शक की अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा देशाभिमान का मुद्दा था, पर उसमें हम पहले दो चरण हार गए. हमारी हार तकनीकि कारणों से नहीं थी. चूँकि हमारे पास वो सारे संसाधन मौजूद थे, जिससे हम अंतरिक्ष यान कक्षा में भेज सकें, जो कि हमने वॉन ब्रौन को अंतरिक्ष में भेज कर सिद्ध भी किया, यही बताते हैं कि ये हार तकनीकि नहीं थी. स्पुटनिक तकनीकि हार नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा की हार थी. अमरीका -- विश्व ने देखा अमरीका तकनीक में सबसे आगे नहीं है, और ये बहुत बड़ी बात है. हमने गैगारिन की अंतरिक्ष यात्रा के कुछ ही हफ्तों के अंदर ऎलन शेफर्ड को अंतरिक्ष भेजा, महीनों या दशकों बाद नहीं. तो वो क्षमता थी हमारे पास. पर अमरीका हार गया. हम हार गए. और इस वजह से, अपनी प्रतिष्ठा फिर स्थापित करने के लिए हमने बहुत बड़ी छलांग लगाई.
फिर भी, मुद्दे की बात यही है कि हम पहले ही रूसियों से शुरु के दो मक़ाम हार चुके हैं. आप आज भी अंतरिक्ष की यात्रा का टिकट अमरीका में नहीं ख़रीद सकते -- पर आप उसे रशिया में ख़रीद सकते हैं. आप रूसी संसाधनों से अंतरिक्ष यात्रा कर सकते हैं, जो कि इस लिए उपलब्द्ध है क्योंकि रूसी अंतरिक्ष कार्यक्रम में धन की ज़बरदस्त कमी है, और एक सीट के बदले बीस मिलियन डॉलर की राशि का वो खुले दिल से स्वागत करेंगे. ये विशुद्ध व्यवसाय है. इसे आप अंतरिक्ष पर्यटन भी कह सकते हें. ये लोग चाँद के चारों ओर दौरा लगाने का भी प्रस्ताव रख रहे हैं, जैसे एपोलो आठ से किया गया था. 100 मिलियन डॉलर -- और हाँ, मैं चाँद जा सकता हूँ. पर जैसा कि आपने '60 के दशक में सोचा होगा, जब ये अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा पूरे ज़ोर पर था, कि पहला आम पूँजिवादियों के तरह का काम यही टिकट ख़रीद कर चाँद पर जाना -- ये रूसी संसाधनों के ज़रीए होगा? और क्या आपने अंदाज़ा लगाया होगा, या रूसियों ने भी कल्पना की होगी, कि जब वो पहली बार अपने पूर्ण विकसित संसाधनों के ज़रीए चाँद पर जाएँ, तो उनके यान में बैठने वाला कोई रूसी नहीं होगा? बल्कि कोई जापानी या अमरीकी करोड़पति होगा? सच में ये बहुत अजीब लगेगा. ख़ैर, मैं सोचता हूँ हमें उन्हे फिर हराना चाहिए.
मुझे लगता है कि हम एक बहुत ही सफल अंतरिक्ष यात्रा उद्योग देखने वाले हैं. इसमें इस बात से कुछ आता नहीं की हम पहले हैं या नहीं. रूसियों ने कॉनकार्ड से पहले ही आवाज़ से तेज़ गति में चलने वाला यान बना लिया था. उससे उन्होने कुछेक मालवाही यात्राएँ करवाईं, ओर फिर उसे सेवा से बाहर कर दिया. आप ऎसे उदाहरण वाणिज्यिक चीज़ों में भी पाएँगे.
ठीक, तो अब हम मनुष्य के अंतरिक्ष यात्रा के वाणिज्यिक पक्ष पर बात करेंगे. ये छोटी सी चीज़ बताती है कि नासा जो 2020 में करेगी, ये उसका कम से कम पाँच गुना होगी. मैं बताना चाहूनासा जो 2020 में चाहूँगा कि अब तक विश्व भर में कम से कम डेढ़ बिलियन से एक दशमलव सात बिलियन डॉलर का निवेश निजी अंतरिक्ष यात्रा के क्षेत्र में हो चुका है, जिसका सरकारों से कोई सरोकार नहीं. अगर आप पढ़ना चाहें -- गूगल में ढूँढना चाहें, आप को इससे लगभग आधे का आंकड़ा मिलेगा, पर असल में उससे दुगनी राशि को इस परियोजना के लिए चिन्हित किया जा रहा है -- अभी ख़र्च नहीं हुई है, पर अगले चंद सालों की योजनाओं के लिए निर्धारित की जा रही है. बहुत बड़ी राशि है. मेरा अनुमान है कि ये उद्योग बहुत ही लाभजनक होगा -- फायदा होना ही है जब आप लोगों से 200,000 डॉलर लेकर उन्हें यात्रा करवाएँ जबकि पूरी व्यवस्था को चलाने का ख़र्च केवल उसका दसवां हिस्सा हो, या उससे भी कम -- बहुत फायदे का सौदा है. मेरा अनुमान ये भी है कि इसमें होने वाला निवेश उस राशि के आधे से भी कम होगा जो अमरीकी करदाता नासा के मानव चालित अंतरिक्ष यान के काम में ख़र्च करता है. और तुलनात्मक रूप से इस काम में लगने वाले हर डॉलर का कम से कम 10 से 15 गुणा बेहतर इस्तेमाल होगा. इसके मायने ये होंगे कि हमारे ठीक से समझने के पहले ही, इंसान की अंतरिक्ष यात्रा में प्रगति, बिना करदाताओं के पैसे के, कम से कम पाँच गुना हो जाएगी नासा के आज के इंसानी अंतरिक्ष यात्रा के लिए बनाए गए बजटों से. और इसका सीधा सा कारण हैं हम. निजी उद्योग. आप इस तरह की चीज़ों के लिए कभी सरकार पर आश्रित नहीं हो सकते -- हम ये बहुत दिनों से करते आए हैं. नासा के पहले NACA (पहले की सरकारी कमीटी जो वैमानिकी में अमरीकी सरकार को परामर्श देती थी ) ने न तो किसी विमान को बनाया और न ही किसी विमान संस्था को चलाया. पर नासा अंतरिक्ष यान बना रही है, हमेशा से बनाती आई है, और अंतरिक्ष यात्रा का ज़रीया केवल उन्ही को उपलब्द्ध है. पर हम उससे बचते आए हैं क्योंकि हमें उससे डर लगता है. लेकिन जून 2004 के बाद, जब मैंने दिखाया कि एक छोटा सा दल भी ये काम कर सकता है, जिससए उसकी स्थापना की शुरुवात होती है, उस समय से सब कुछ बदल गया.
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इस आवेगपूर्ण भाषण में प्रसिद्ध स्पेसक्राफ्ट डिज़ाईनर बर्ट रुटान अमरीकी सरकार द्वारा प्रायोजित स्पेस प्रोग्राम में आए ठहराव की तीव्र आलोचना करते हैं एवं जहाँ से नासा ने इसे छोड़ा, वहीं से उद्योगपतियों को इसका बीड़ा उठाने को कहते हैं .
In 2004, legendary spacecraft designer Burt Rutan won the $10M Ansari X-Prize for SpaceShipOne, the first privately funded craft to enter space twice in a two-week period. He's now collaborating with Virgin Galactic to build the first rocketship for space tourism. Full bio »
Translated into Hindi by Arpita Bhattacharjee
Reviewed by Anshul Tyagi
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It’s not good enough for us to have generations of kids that … look forward to a better version of a cell phone with a video in it. They need to look forward to exploration.” (Burt Rutan)
17:43 Posted: Jun 2007
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18:19 Posted: May 2008
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20:22 Posted: Jun 2008
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