पिछले हफ़्ते फ़ाउण्डेशन संबंधी बातों को लेकर मैंने एक पत्र लिखा, कुछ समस्याओं का ज़िक्र करते हुए। और वारेन बफ़ेट ने मुझे सुझाव दिया कि मैं यह करता हूँ -- क्या अच्छा हुआ, क्या नहीं इस बारे में ईमानदार रहते हुए, और इसे एक सालाना क्रम बनाते हुए। मेरा उद्देश्य था उन समस्याओं पर काम करने के लिए अधिक लोगों को लाना, क्योंकि मुझे लगता है कि कुछ समस्याएँ बहुत महत्वपूर्ण हैं जिन पर अपने आप काम नहीं हो सकता। अर्थात वैज्ञानिकों, संचारकों, विचारकों, सरकारों को सही चीज़ें करने के लिए बाज़ार प्रेरित नहीं करता। केवल इन चीज़ों पर ध्यान देकर और बेहतर लोगों को साथ लेकर जो समझते हैं और दूसरे लोगों को भी समझाकर क्या हम उतना आगे बढ़ सकते हैं जितना ज़रूरी है।
तो आज सुबह मैं उनमें से दो समस्याएँ बाटूँगा और बात करेंगे उनकी स्थिति के बारे में। लेकिन उन पर जाने से पहले मैं यह स्वीकारना चाहता हूँ कि मैं आशावादी हूँ। कितनी भी मुश्किल समस्या हो, मैं मानता हूँ कि हल की जा सकती है। और इसी संदर्भ में मुझे लगता है कि एक ज़रिया है अतीत में देखा जाए। पिछली सदी से, औसत जीवनकाल दुगुने से भी ज़्यादा हो गया है। एक और आंकड़ा जो मुझे पसंद है, बाल मृत्युदर को देखें। 1960 के दौरान, 11 करोड़ बच्चे पैदा हुए और उनमें से 2 करोड़ पाँच साल से ज़्यादा जीवित नहीं रहे। पाँच साल पहले, साढ़े 13 करोड़ बच्चे पैदा हुए थे -- इसी तरह, और -- और उनकी संख्या 1 करोड़ से कम थी जो पाँच साल से ज़्यादा जीवित नहीं रहे। तो ये दिखाते है कि बाल मृत्युदर पहले से आधी हो गयी है । यह वास्तव में कमाल है। उनमें से हर एक की ज़िंदगी बहुत कीमती है।
और प्रमुख कारण जिसकी वजह से यह हो सका सिर्फ़ बढ़ती आमदनी नहीं थी बल्कि कुछ महत्वपूर्ण सफ़लताएँ हैं: टीके, जिनका उपयोग व्यापक रूप से किया गया। उदाहरण के लिए, खसरे से चालीस लाख मौत हुई थी 1990 के दौरान और अब 4,00,000 से भी कम है। हम वाकई बदलाव ला सकते हैं। अगली उपलब्धि है उस एक करोड़ को आधा करना. और मुझे लगता है कि यह 20 से कम सालों में हो जाएगा। क्यों? क्योंकि कुछ ही बीमारियाँ हैं जो इनमें से अधिकांश मौतों का कारण हैं: डायरिया, निमोनिया और मलेरिया।
तो इस प्रकार हम उस समस्या पर आते हैं जिसका ज़िक्र मैं सुबह करने वाला हूँ, वो यह कि किस प्रकार हम मच्छरों द्वारा फ़ैलाई जाने वाली जानलेवा बीमारी को रोक सकते हैं?
इस बीमारी का इतिहास क्या है? यह हज़ारों सालों से एक भयंकर बीमारी रही है। वास्तव में, यदि हम इसकी उत्पत्ति देखें, केवल यही बीमारी हम देखते हैं जिसके लिए अफ़्रीका निवासियों ने मलेरिया से हुई मौतों से बचने के लिए कई चीज़ों का विकास किया। मौतें वास्तव में 1930 वाले काल के दौरान बढ़कर सबसे ज़्यादा पचास लाख हो गई। तो यह यकीनन बहुत भारी थी। और बीमारी दुनिया भर में फैली थी। एक भयानक बीमारी। जो अमेरिका में थी। जो युरोप में थी। 1900 के शुरुआत में लोग नहीं जान पाए कि इसका कारण क्या है, तब एक ब्रिटिश सैनिक ने पता लगाया कि यह मच्छरों से थी। इसलिए सब जगह थी। और दो उपकरणों ने मृत्यु दर को नीचे लाने में सहयोग दिया। एक था डीडीटी से मच्छरों को मारना। दूसरा था कुनैन और कुनैन सजातीय द्वारा मरीजों का इलाज करना। और इस प्रकार मृत्यु दर नीचे आई।
अब, विपरीत तरीके से देखें कि क्या हुआ, इसका खात्मा परिमित क्षेत्रों से किया गया, जहाँ सम्पन्न देश आते हैं। तो हम देखते हैं: 1900, यह सब जगह है। 1945, अभी तक अधिकांश स्थानों में है। 1970, यूएस और अधिकांश यूरोप इससे छुटकारा पा चुके हैं। 1990, अधिकांश उत्तरी क्षेत्र इससे मुक्त हैं। और हाल ही में आप देख सकते हैं कि यह सिर्फ़ भूमध्य रेखा के आसपास है।
और इसी लिए यह इस विरोधाभास पैदा करता है कि क्योंकि यह बीमारी केवल गरीब देशों में है, इसमें ज़्यादा निवेश नहीं हो पाता। उदाहरण के लिए, गंजेपन की दवाइयों पर ज़्यादा धन लगाया जाता है मलेरिया के मुकाबले। गंजापन, एक भयंकर चीज़ है। (हँसी) और अमीर लोग पीड़ित हैं। और इसी कारण से प्राथमिकता तय हुई है।
लेकिन, मलेरिया -- एक साल में मलेरिया से करोड़ मौतें होने पर भी इसके प्रभाव को बहुत ही कम आंका गया है। एक समय में 20 करोड़ से भी ज़्यादा लोग इससे ग्रस्त रहते हैं। यानी इन क्षेत्रों में आपको अर्थव्यवस्था अच्छी नहीं मिलेगी क्योंकि इसने काफ़ी समय से जकड़ रखा है। मलेरिया, वास्तव में मच्छरों द्वारा फैलता है। कुछ को मैं लेकर आया हूँ, ताकि आप इसे अनुभव कर सकें। इन्हें थोडा ऑडिटोरियम में चारों ओर घूमने देते हैं। (हँसी) यह अनुभव भला केवल गरीब लोग ही क्यों लें। (हँसी) (तालियाँ) वैसे ये मच्छर संक्रमित नहीं हैं।
तो हम कुछ नई चीज़ें लेकर आए। मच्छरदानी। और मच्छरदानी एक बेहतरीन साधन है। मतलब ये कि माँ और बच्चे को रात में मच्छरदानी में रहना है, ताकि रात को काटने वाले मच्छर उन तक न पहुँच सकें। और जब आप डीडीटी युक्त स्प्रे का उपयोग घर में करते हैं और इन मच्छरदानियों का तो आप 50 प्रतिशत मौतें कम कर सकते हैं। और कुछ देशों में यह हो रहा है। यह देखकर बहुत अच्छा लगता है।
लेकिन हमें सावधान रहना होगा क्योंकि मलेरिया -- बीमारी पनपती है और मच्छर भी। तो प्रत्येक साधन जिसे हम पहले काम में ले चुके हैं एक समय पर अप्रभावी हो जाते हैं। और इस तरह आपके पास अंत में दो विकल्प रहते हैं। यदि आप एक ऐसे देश में जाते हैं जहाँ सही साधन और सही तरीके हैं, आप खुलकर रहते हैं, आप वास्तव में स्थानीय समाधान प्राप्त कर सकते हैं। और वहाँ हम देखते हैं कि मलेरिया का दायरा कम है। या, यदि आप किसी बेमन वाली जगह जाते हैं, तो कुछ समय के लिए आप इस बीमारी का बोझ कम कर दें, लेकिन धीरे-धीरे वो साधन अप्रभावी हो जाएँगे, और मृत्युदर वापस बढ़ने लगेगी। और जब दुनिया में ऐसा हुआ तब इस पर ध्यान दिया गया और फिर ध्यान नहीं दिया।
अब हम बढ़ रहे हैं। मच्छरदानी का कोश बढ़ रहा है। नई दवाई की खोज जारी है। हमारी फ़ाउण्डेशन ने एक वैक्सीन पर काम किया है जो तीसरे ट्रायल के दौर में है जो आने वाले महीने में शुरु होगा। और जो संभवतः दो तिहाई से अधिक जान बचाएगा यदि प्रभावी रहा तो। तो हमारे पास ये नए उपकरण होने वाले हैं।
लेकिन केवल यह ही हमें रास्ता नहीं दिखाता। क्योंकि इस बीमारी से बचने के रास्ते में बहुत सी चीज़ें हैं। इसमें आवश्यकता है संचारकों की जो कोश एकत्रित कर सकें, सोच बनाए रखने के लिए, सफलता की कहानियाँ सुनाने के लिए। आवश्यकता है सामाजिक वैज्ञानिकों की, ताकि हम जान सकें कि मच्छरदानी का उपयोग केवल 70 प्रतिशत लोगों तक न रहे, बल्कि 90 प्रतिशत हो। हमें आवश्यकता है गणितज्ञों की जो आगे आएँ और इसे सुलझाएँ, कुछ मोण्टे कार्लो करें यह समझने के लिए कि किस तरह इन उपकरणों को मिलाकर एक साथ काम किया जाए। बेशक हमें आवश्यकता है दवा कंपनियों की जो हमें अपनी विशिष्टता दें। हमें आवश्यकता है दुनिया की अमीर सरकारों की जो इन चीज़ों में सहायता प्रदान करने के लिए उदार बनें। और इस तरह ये सभी एक साथ होकर, मैं इसे लेकर आशावादी हूँ कि हम मलेरिया को जड़ से मिटा देंगे।
चलिए मैं अब एक दूसरे प्रश्न की ओर बढ़्ता हूँ, एक बिल्कुल अलग प्रश्न, लेकिन मैं कहूँगा उतना ही महत्वपूर्ण। वो यह: कैसे एक महान अध्यापक बनाएँ? यह ऐसा प्रश्न है जिस पर लोग काफ़ी समय खर्च करेंगे, और हम यह अच्छी तरह समझते हैं। और उत्तर है, सचमुच हम नहीं जानते। चलिए इससे शुरु करते हैं कि यह क्यों महत्वपूर्ण है। मुझे विश्वास है कि, हम सभी जो इस समय यहाँ हैं, के कुछ अध्यापक महान थे। हमें बहुत अच्छी शिक्षा मिली है। यही एक कारण है कि हम आज यहाँ हैं, इसी कारण की वजह से हम सफल हैं. हालांकि मैं कॉलेज ड्रॉप-आउट हूँ पर फिर भी यह कह सकता हूँ। मेरे अध्यापक महान थे।
वास्तव में, यूनाइटेड स्टेट्स में, शिक्षण प्रणाली ने बहुत अच्छा काम किया है। यहाँ सीमित स्थानों में बहुत प्रभावशाली अध्यापक हैं। इसलिए श्रेष्ठ 20 प्रतिशत छात्रों ने अच्छी शिक्षा प्राप्त की है। और वो 20 प्रतिशत दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं, यदि आप दुनिया के अन्य श्रेष्ठ 20 प्रतिशत से तुलना करें। और उन्होंने सॉफ़्टवेयर और बायोटेक्नॉलोजी में क्रांति उत्पन्न की है और यू एस को सबसे आगे बानाए हुए हैं।
अब, उन 20 प्रतिशत की ताकत तुलनात्मक रूप से कम होना शुरु हो गई है, लेकिन उससे अधिक चिंताजनक है शिक्षा का संतुलन जो लोग प्राप्त कर रहे हैं। वह न सिर्फ़ कमज़ोर है; कमज़ोर हो रहा है। और यदि आप अर्थव्यवस्था को देखें, यह केवल उन लोगों को अवसर प्रदान कर रही है जिनके पास बेहतर शिक्षा है। और हमें इसे बदलना है। हमें इसे बदलना है ताकि लोगों को समान अवसर मिले। हमें इसे बदलना है ताकि देश मजबूत हो और हमेशा आगे रहे उन चीज़ों में जो उन्नत शिक्षा द्वारा संचालित हैं, जैसे विज्ञान और गणित।
जब मैंने सबसे पहले सांख्यिकी सीखा मैं चौंक गया था कि चीज़ें कितनी बुरी हैं। 30 प्रतिशत से अधिक बच्चे हैं जिन्होंने उच्च स्कूली शिक्षा पूरी नहीं की। और यह काफ़ी लम्बे समय तक छुपाया गया क्योंकि वे हमेशा ड्रॉपआउट दर को एक ऐसी संख्या के रूप में लेते थे जिन्होंने सीनियर वर्ष में शुरु किया और इसकी तुलना की जाती थी उस संख्या से जिन्होंने सीनियर वर्ष पूरा किया. क्योंकि वे यह ट्रैक नहीं कर रहे थे कि उससे पहले बच्चे कहाँ थे। लेकिन अधिकाँश ड्रॉपआउट उससे पहले हो चुके थे। उन्हें कथित ड्रॉपआउट दर को बढ़ाना पड़ा जैसे ही ट्रैकिंग पूरी हुई 30 प्रतिशत से अधिक। अल्पसंख्यक बच्चों के लिए, यह 50 प्रतिशत से अधिक है। और भले ही आप हाई स्कूल से ग्रेजुएट हों, यदि आपकी निम्न-आय है, तो आपके लिए कॉलेज डिग्री पूरी करने की संभावना 25 प्रतिशत से भी कम है। यदि यूनाइटेड स्टेट्स में आपकी निम्न-आय है, तो आपके जेल जाने की ज्यादा संभावना है एक चार साल की डिग्री प्राप्त करने के मुकाबले। और यह सब पूरी तरह से ठीक नहीं लगता।
तो, आप किस तरह शिक्षा को बेहतर बनाएँगे?
फ़िलहाल, हमारी फ़ाउण्डेशन ने, पिछले नौ सालों से, इस पर काफ़ी काम किया है। बहुत से लोग इसमें जुटे हैं। हमने छोटी स्कूलों पर काम किया, छात्रवृत्ति प्रदान की, हमने लाइब्रेरियों पर काफ़ी चीज़ें की। बहुत सी चीज़ों का प्रभाव अच्छा रहा। लेकिन हमने जितना ज़्यादा देखा, हमने पाया की बेहतरीन शिक्षकों की आवश्यकता बहुत मुख्य चीज़ थी। और हम कुछ लोगों से मिले जो इस पर काम कर रहे थे कि शिक्षकों के बीच कितनी असमानता है, मसलन, शीर्ष एक चौथाई भाग -- सबसे बेहतर -- और निचले एक चौथाई। एक स्कूल में या स्कूलों के बीच कितनी असमानता है? और जवाब यह है कि ये असमानताएँ वास्तव में अविश्वसनीय हैं। शीर्ष एक चौथाई शिक्षक अपनी कक्षा का प्रदर्शन बढ़ाते हैं -- परीक्षा परिणामों पर आधारित -- एक साल में 10 प्रतिशत से अधिक। इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है कि यदि पूरा यू एस, दो सालों के लिए, श्रेष्ठ एक चौथाई शिक्षक रखे, तो हमारे और एशिया के बीच का पूरा अंतर खत्म हो जाएगा। चार सालों के भीतर हम दुनिया में सभी को परे बिठा देंगे।
तो, यह आसान है। बस ज़रूरत है उन श्रेष्ठ एक चौथाई शिक्षकों की। और इस तरह आप कहेंगे, "वाह, हमें इन लोगों को पुरस्कार देना चाहिए। हमें इन लोगों को प्रोत्साहन देना चाहिए। हमें पता लगाना चाहिए कि वे क्या कर रहे हैं और उनकी योग्यता को दूसरे लोगों में विकसित करना चाहिए।" लेकिन, मैं आपको बताता हूँ कि आज ऐसा बिल्कुल नहीं हो रहा है।
इस श्रेष्ठ एक चौथाई की क्या विशेषताएँ हैं? ये कैसे लगते हैं? आप सोच रहे होंगे कि ये बहुत सीनियर शिक्षक होने चाहिए। लेकिन जवाब है नहीं। जब कोई हमें तीन साल पढ़ाता है उसकी पढ़ाने की गुणवत्ता लगातार नहीं बदलती। बहुत, बहुत कम बदलाव आता है। आप सोचेंगे कि ये लोग मास्टर डिग्री वाले हैं। वे जा चुके हैं और उन्होंने अपनी शिक्षा की मास्टर उपाधि प्राप्त कर ली है। इस चार्ट में चार अलग अलग कारक हैं। और देखते हैं कि ये शिक्षण गुणवत्ता को कैसे समझाते हैं। सबसे नीचे, जो दिखाता है कि वहाँ कोई प्रभाव नहीं है, वो मास्टर डिग्री है।
अभी, जिस तरह आय प्रणाली काम करती है दो चीज़ों को पुरस्कृत किया जाता है। पहली है वरिष्ठता। क्योंकि आपकी आय बढ़ती है और आप अपनी पेंशन बनाते हैं। दूसरी है उन लोगों को अधिक धन देना जिनके पास मास्टर डिग्री है। लेकिन यह किसी भी तरीके से एक अच्छे शिक्षक होने से संबंधित नहीं है। अमेरिका के लिए पढ़ाएँ: इससे थोड़ा प्रभाव पड़ेगा। गणित शिक्षकों के लिए गणित में विशिष्टता से थोड़ा बेहतर प्रभाव पड़ेगा। लेकिन, पूरे ज़ोर से, यह आपका पिछला प्रदर्शन है। कुछ लोग हैं जो इसमें बहुत अच्छे हैं। और हमने लगभग कुछ नहीं किया यह पढ़ने में कि यह क्या है और इसे आकार देने में और आधार देने में, औसत सामर्थ्य बढ़ाने के लिए -- या लोगों को प्रोत्साहन देने में कि वो इस प्रणाली में बने रहें।
आप कह सकते हैं, "क्या अच्छे शिक्षक रहते हैं और बुरे शिक्षक छोड़ जाते हैं?" उत्तर है, औसत रूप से, थोड़े से बेहतर शिक्षक प्रणाली छोड़ देते हैं। और यह प्रणाली है बहुत उच्च बिक्री युक्त है।
अभी, कुछ स्थान हैं -- बहुत कम -- जहाँ महान शिक्षक बनते हैं। एक अच्छा उदाहरण है विशेष स्कूलों का एक समूह के आई पी पी। के आई पी पी अर्थात नॉलेज इज़ पावर। यह एक अविश्वसनीय चीज़ है। उनके 66 स्कूल हैं -- अधिकाँश माध्यमिक स्कूल, कुछ उच्च स्कूल -- और जो हो रहा है वो है बेहतरीन शिक्षा। वे सबसे गरीब बच्चों को लेते हैं, और उनके 96 प्रतिशत से भी अधिक उच्च स्कूल ग्रेजुएट चार-वर्षीय कॉलेजों में जाते हैं। और उन स्कूलों में उत्साह और रवैया सामान्य पब्लिक स्कूल से बहुत अलग है। वे शिक्षण टीम हैं। वे लगातार अपने शिक्षकों को बेहतर बना रहे हैं। वे डाटा, परीक्षा प्राप्तांक लेते हैं, और शिक्षक से कहते हैं, "जनाब, इस बढ़त के लिए आप जिम्मेदार हैं।" वे शिक्षण को बेहतर बनाने में पूरी तरह से लगे हुए हैं।
वास्तव में जब आप इनमें से किसी एक कक्षा में जाते हैं और बैठते हैं, पहली बार में बड़ा बेतुका लगता है। मैं बैठे हुए सोच रहा था, "यह क्या हो रहा है?" शिक्षक चारों तरफ़ दौड़ रहा था, और कमाल की ऊर्जा थी। मुझे लगा, "मैं किसी खेलकूद रैली जैसी जगह पर हूँ। क्या हो रहा है ये?" और शिक्षक लगातार यह पता लगाने के लिए देख रहा था कि कौन से बच्चे ध्यान नहीं दे रहे, कौन बोर हो रहे थे, और तेज़ी से बच्चों को कह रहा था, मेरा ध्यान सब पर है। बहुत ही गतिशील वातावरण था, क्योंकि विशेष रूप से माध्यमिक स्कूल के उन वर्षों में -- पांचवी से आठवीं तक -- लोगों को जोड़े रखने के लिए और एक लय बनाने के लिए ताकि कक्षा में सभी ध्यान दें, कोई भी इसका मज़ाक न बनाए या उस बच्चे का स्थान ले जिसका ध्यान कहीं और है। सभी को ध्यान देने की ज़रूरत है। और यही के आई पी पी कर रहा है।
इसकी तुलना एक सामान्य स्कूल से कैसे की जा सकती है? एक आम स्कूल में शिक्षकों को यह नहीं बताया जाता कि वे कितने अच्छे हैं। डाटा इकट्ठा नहीं किया जाता। शिक्षक के कॉण्ट्रैक्ट में, प्रिंसीपल के कक्षा में आने की सीमा तय की जाती है -- कई बार साल में सिर्फ़ एक बार। और उन्हें ऐसा करने से पहले सूचना देनी होती है। तो सोचिये एक फ़ैक्ट्री है जहां काम करने वाले हैं, जिनमें से कुछ घटिया काम करते हैं और मैनेजमेंट से कहा जाता है, "साहब, आप साल में केवल एक बार आ सकते हैं, लेकिन आपको हमें पहले बताना होगा, क्योंकि यदि हम आपको मूर्ख बना रहे हों, तो हम उस बड़े क्षण में अच्छा काम करने की कोशिश करें।"
बल्कि एक शिक्षक जो अच्छा करना चाहता है उसके पास उपकरण नहीं है करने के लिए। उनके पास परीक्षा प्राप्तांक नहीं हैं, और एक पूरी चीज़ है जो डाटा ब्लॉक करने की कोशिश करती है। उदाहरण के लिए, न्यूयॉर्क में एक कानून पास हुआ जिसमें कहा गया कि शिक्षक सुधार डाटा उपलब्ध नहीं किया जाएगा और काम में नहीं लिया जाएगा शिक्षकों के पद की अवधि निर्धारण हेतु। और यह विपरीत दिशा में हो रहा काम है। लेकिन मैं इस बारे में आशावादी हूँ, मुझे लगता है कि कई साफ़ चीज़ें हैं जो हम कर सकते हैं।
सबसे पहले, अच्छे खासे परीक्षण करने की ज़रूरत है, ताकि हम सही तस्वीर देख पाएँ कि हम कहाँ हैं। और उससे हम यह मझ पाएँगे कि कौन अच्छा कर रहा है, और उन्हें बुलाकर, पता लगाएँ कि वे कौनसी तकनीकें हैं। बेशक, डिजीटल वीडियो अब काफ़ी सस्ता है। कुछ कैमरे कक्षा में लगाकर और बताकर कि रिकॉर्डिंग नियमित रूप से की जाएगी सभी पब्लिक स्कूलों के लिए बहुत प्रायोगिक है। और इस तरह शिक्षक सप्ताह में कभी बैठें और बताएँ, "हाँ, इस क्लिप में मुझे लगता है कि अच्छा हुआ है। इस क्लिक में मुझे लगता है मैंने गलत किया। मुझे बताएँ -- उस बच्चे के वैसा करने पर मुझे क्या करना चाहिए था?" और वे सब एक साथ बैठकर उन समस्याओं पर काम कर सकते हैं। आप सबसे बेहतरीन शिक्षक ले सकते हैं और इस तरह की गतिविधि कर सकते हैं, ताकि सब जान पाएँ कि इस बात को समझाने में कौन सबसे बेहतर है।
आप वे बेहतरीन कोर्स लेकर उन्हें उपलब्ध करा सकते हैं ताकि कोई बच्चा जा सके और वह कोर्स देख सके, उससे सीख सके। यदि कोई बच्चा है जो कमज़ोर है, आप जानकर विषय को देखने और दोहराने के लिए उसे वह वीडियो निर्दिष्ट कर सकते हैं। और, ये मुफ़्त कोर्स केवल इंटरनेट पर ही उपलब्ध न रहे, आप डीवीडी बना सकते हैं जो हमेशा उपलब्ध रहे, और इस तरह हर कोई जिसके पास डीवीडी प्लेयर है उसके पास बेहतरीन शिक्षक है। और इसे एक निजी सिस्टम के रूप में सोचते हुए, हम और बेहतर कर सकते हैं।
एक किताब है, के आई पी पी पर -- एक जगह जहाँ ऐसा होता है -- जे मैथ्यूज़, एक समाचार पत्रकार, ने लिखी है -- "वर्क हार्ड, बी नाइस।" और मुझे लगा कि यह बहुत अच्छी है। यह आपको बताती है कि एक अच्छा शिक्षक क्या करता है। यहाँ आए सभी लोगों को मैं इस किताब की एक प्रति मुफ़्त दूँगा। (तालियाँ)
हमने शिक्षा पर काफ़ी खर्च किया है, और मुझे वाकई लगता है कि शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है देश के हित में और एक मजबूत भविष्य बनाने में जैसा कि होना चाहिए। वास्तव में हमारा एक उकसाने वाला विधेयक है -- रुचिकर है -- इन डाटा सिस्टम के लिए हाउस संस्करण ने इसमें धन लगाया है, और यह सीनेट में लिया गया है क्योंकि कुछ लोग हैं जो इन चीज़ों से भयभीत हैं।
लेकिन मैं -- मैं आशावादी हूँ। मुझे लगता है कि लोग यह अनुभव करने लगे हैं कि यह कितना महत्वपूर्ण है, और यह वाकई लाखों लोगों की ज़िंदगी में एक बदलाव ला सकता है, यदि हम इसे कर पाए। मेरे पास केवल इतना ही समय था कि इन दो समस्याओं पर बात कर सकूँ। इस तरह की बहुत सी समस्याएँ और हैं -- एड्स, निमोनिया -- मैँ देख रहा हूँ कि आप उत्सुक हैं, इन जैसे कई नामों को लेकर। और इन चीज़ों से निपटने के लिए दक्षता बहुत व्यापक है। आप जानते हैं, सिस्टम अपने आप कुछ नहीं करता। सरकारें अपने आप सही तरीके से ये चीज़ें नहीं चुनतीं। प्राइवेट सेक्टर इन चीज़ों में अपने आप अपने संसाधन नहीं लगाता।
तो इसमें ज़रूरत है आप जैसे बेहतरीन लोगों की इन चीज़ों को पढ़ने के लिए, दूसरे लोगों को लाने के लिए -- और आप समाधान निकालने में सहायक बन रहे हैं। और इसके साथ, मुझे लगता है कई बेहतरीन चीज़ें हैं जो निकलकर आएँगी।
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A passionate techie and a shrewd businessman, Bill Gates changed the world once, while leading Microsoft to dizzying success. Now he's set to do it again with his own style of philanthropy and passion for innovation. Full bio »
Translated into Hindi by Vineet Choraria
Reviewed by Anshul Tyagi
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16:41 Posted: Jan 2007
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